पड़ाव

तरही गजल :-

देखा नहीं है आप को अरसा गुजर गया।।
दीदार की खातिर भी मैं इधर उधर गया।।

आदत मेरी खराब थी लोगों की नजर में।
करके लिहाज आप का काफी सुधर गया।।

लगता है कि वो शख्स सियासत में आ गया।
मौका पड़ा तो वादे से अपने मुकर गया।।

ऐसे पड़ाव पर खड़ी है जिन्दगी मेरी।
थोड़ा बहुत बचा था जो मेरा असर गया।।

हर हाल में आगे की तरफ बढ़ते जाइये।
वो खत्म हो गया है जो बिल्कुल ठहर गया।।
**जयराम राय **

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu