अर्धांगिनी

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अर्धांगिनी

तुम हो अर्धांगिनी !
तुम अब आ रही हो !

तुम अब आ रही हो तो वो कौन थी ?
जो पिछले सात सालों से मेरे साथ थी
जो रतजगो का आदी बना गई ,
चैन – सुकून लूट गई ,
मुहल्ले में बदनाम कर गई ,
अपना अपना कहकर
मेरे अपनों से मुझे दूर कर गई
वो कौन थी ?

खैर अगर अर्धांगिनी तुम हो
और मेरे जीवन में आ रही हो
तो इतना जानलो
मेरे पास अब कुछ भी नहीं बचा है
जिसे तुम लूट सको |

अगर फिर भी तुम आना चाहती हो
तो मेरे खाली – कोरे जीवन में ,
तुम्हारा स्वागत है |

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