वो मुझसे से कहती है

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वो मुझसे से कहती है

By |2018-04-26T01:03:31+00:00April 25th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

वो मुझसे कहती है कि –
तुम य़ूँ उदासियां मत लिखा करो
इन्हें पड़कर मैं बहुत उदास हो जाती हूँ ।
तुम्हे लिखना ही है,तो लिखो-
कि मैं नई साड़ी में अप्सरा लगती हूँ ।
लिखो कि तुम्हें मेरे गीले बालों के छिंटे,
बारिश से ज्यादा अच्छे लगते हैं ।
लिखो कि तुम्हें होटलों का खाना पसन्द नही है,वो तो तुम ;
यदा-कदा या मजबूरी(जैसे मेरे नहीं होने पर) में ही खाते हो,
उंगलियाँ तो तुम मेरे हाथों से बने खाने पर ही चाटते हो ।

मैं अजब किस्म क पागल आदमी…
कि प्रेम से भी डरता हूँ ।

और शायद लिखने में लिख भी देता
मगर ये ख्वाबों की बातें तो बेसिर-पैर की बातें हैं ।
ख्वाबों में तो य़ूँ ही बड़बड़ाती रहती है ।

कभी आयेगी पास तो सोचेंगे –
कि प्रेम लिखें या उदासियाँ।

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लिखने का शौक है

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