आंखों की गागर छलक रही है ।
फिर भी यादें महक रही है ।

तुम चली आओ,आ गई बरखा ।
टुट न जाए,मोती ये मनका ।
तेरा नाम मैंने लिखा खत पे,
देख हवाएँ महक रही है ।

आंखों की गागर छलक रही है
फिर भी यादें महक रही है ।

पेड़ों ने औढ़नी,औढ़ी हरियाली ।
अपना तो घर,फिर भी है खाली ।
तुम नहीं हो तो क्या है ये मौसम,
सांसे तो तुझपे अटक रही है ।

आंखों की गागर छलक रही है ।
फिर भी यादें महक रही है |

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