आशिफा

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आशिफा

ना धर्म लाओ, न जात लाओ,
न बीच में सरकार लाओ,
जो दोषी है जघन्य इस जघन्य अपराध के,
उन्हें सरेआम लाओ ;
न्याय है न्यायालय में तो,
“आसिफा” के क़ातिलों का,
मौत का फ़रमान लाओ|
‘इंसानियत कन्हि खो गई है इस जहां में,
समाज से पहले इंसानो खुद में बदलाव लाओ|

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2 Comments

  1. Mahesh Chauhan Chiklana April 16, 2018 at 12:54 pm

    Shandar

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  2. कठुआ के रसाना गांव में हुई घटना में बच्ची की जो फोटो दिख रही है,वह जूते पहने हुए है।
    कश्मीर पुलिस कह रही है कि उसके साथ 8 दिन तक बलात्कार होता रहा। क्या 8 दिन तक जूते पहने – पहने ही बलात्कार होता रहा?
    “मक्कार कश्मीरी जिहादी पुलिस” बता रही है कि बच्ची को मंदिर में रखा,पर मंदिर में तो उस दौरान भंडारा हुआ था।तब न किसी को लाश दिखी,न बदबू आई।
    पहली बार इस लाश के मिलने पर ,जांच करने वाले स्थानीय पुलिसकर्मियों को अब कश्मीरी SIT ने अभियुक्त बना दिया है- सभी हिंदू हैं।पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में “हत्या” हुईं, बलात्कार नहीं हुआ,यह रिपोर्ट थी।कश्मीरी SIT ने दूसरी बार कब्र से लाश निकलवा कर पोस्ट मार्टम करवाया और जबर्दस्ती बलात्कार लिखवाया। फिर तीसरी SIT ने फिर से पोस्ट मार्टम करवाया।मतलब अपने मन पसंद की रिपोर्टों के बनने तक कश्मीरी SIT के षड्यंत्र चलते रहे।
    इस बीच आस पास के सारे हिंदू लड़के उठवा कर ,उनके साथ जबर्दस्त अत्याचार किए गए।इतने कि उस इलाके के सारे ही लड़के भाग गए हैं।हिंदू आबादी में ठीक कश्मीर घाटी की तरह पुलिसिया अत्याचारों से आतंक फैलाया जा रहा है,ताकि हिंदू आबादी कश्मीर घाटी की तरह वहाँ से भी भागने पर विवश हो जाए।
    यह घटना जनवरी महीने की है।मीडिया में हायतोबा अप्रैल में मची।वह भी तब जब स्थानीय जनता रोहिंगियाओं के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने लगी और उन्हें पर्याप्त समर्थन भी मिलने लगा।जम्मू के लोगों ने इस मामले की जांच -CBI से करवाने और रोहिंगियाओं को निकालने के लिए जो प्रदर्शन,जुलूस निकाले,उन्हें हमारी बिकाऊ मीडिया ने बलात्कारियों के समर्थन में निकाली गई रैली बता कर दुष्प्रचार किया ।अभी जब बलात्कार ही संदिग्ध है,तब बलात्कारियों को बचाने की बात करना एक षड्यंत्री एजेंडा फैलाना नहीं है?
    आप लोगों में से कितने हैं जो अपने बाप के सामने अपनी पत्नी को ‘किस’ कर सकते हैं?शायद कोई भी नहीं।पर इस केस की चार्जशीट कहती है कि बाप- बेटे -भतीजे ने एक साथ ‘रेप’ किया।क्या हमारे यहां यह संभव है ?
    यह केस उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री रहने के दौरान हुए एक मामले की तरह है जिसमें बरसाती नाले में बह गई दो लड़कियों को पहले पोस्टमार्टम में -डूबने से हुई मौत -बताया गया था।पर फिर बनी SIT ने इसे – सेना द्वारा बलात्कार कर की गई हत्या- बता दिया।दूसरी बार पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से अन्य महिलाओं के Swab लेकर जांचें करवाईं और एक कमीशन बनाकर रिपोर्ट बनाई गई कि सेना ने ही बलात्कार कर हत्या की थी।बाद में सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच करवाई और मौत डूबने से ही हुईं – यह सिद्ध हो पाया।
    मीडिया+ सेकुलर+ टुकड़े टुकड़े गैंग बहुत शातिर तरीके से अपनी चालें चल रहे हैं।सावॉधान रहें ।

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