ना धर्म लाओ, न जात लाओ,
न बीच में सरकार लाओ,
जो दोषी है जघन्य इस जघन्य अपराध के,
उन्हें सरेआम लाओ ;
न्याय है न्यायालय में तो,
“आसिफा” के क़ातिलों का,
मौत का फ़रमान लाओ|
‘इंसानियत कन्हि खो गई है इस जहां में,
समाज से पहले इंसानो खुद में बदलाव लाओ|

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