आज देश की मांग है बड़े साहित्यकारों से जागो और अपना कर्तव्यों का निर्वाह करिए, हम तो समाज में एक चींटी के समान हैं फिर भी यथायोग्य कहने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अगर आप बोलेंगे तो तो सभी पर असर जरुर होगा। इस लिए विनती है अपने बाण शब्दों से श्रध्दांजलि नन्ही बच्चियों को दें|

देशके बड़े बड़े साहित्यकारो!
क्यों कलम तुम्हारी चुप रही?
सो रही क्या आत्मा,
जो शब्द बाण चलते नहीं,
वक्त श्रंगार रस लिखने का नहीं;
लिखना वीर रस भी छोड़ दो,
करुण वेदना झकझोर रही,
संभांत नागरिक रो रहा आज है|
उठाओ कलम अपनी,
को़ध और रोष जितना आपके,
अंदर है जो भरा हुआ,
पन्नों को शब्द बाण से बींध दो,
आज तुम्हारी ओर देख रहीं;
देश की कन्याएं सभी,
शायद तुम्हारे तंज बाण से,
जग जाएं देश के राजा सभी|
                -नीरजा शर्मा

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