गर्मी की दोपहर

हवाओं में जहर सा छा रहा है,
मजा अब दोपहर का आ रहा है….. !
ये सूरज की तपिस,यादें पुरानी गर्म करती है,
कहीं फिर दर्द का एक गीत कोई गा रहा है …..!

 

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