तुम्हारी आँखें बहुत सुन्दर है

बहुत दिनों से मेरे दिल में
मचल रहे थे कुछ अरमान
कुछ मनसुबे , जिन्हें
यूं ही गढ़ता रहा था मैं
एक बात जो
तड़पाने लगी थी मुझे ।

इसीलिए एक दिन मैंने
रोक लिया रास्ता उसका
और उसकी आँखों में झांककर कहा –
“तुम्हारी आँखें बहुत सुन्दर है”
वह मुस्कुराई , हल्के -से
इतने हल्के कि
सिर्फ उसकी आँखों से ही पता चल रहा था
कि वह खुश हुई है मेरी बात से
मैंने फिर कहा –
“मुझसे दोस्ती करोगी”
इस बार,जोर से हँस पड़ी वो
खिलखिलाते हुए
हँसते हुए अपना इक हाथ
अपने मुँह पर रख लिया उसने
ताकि उसके दांतो का सेट
जो नकली होगा (शायद)
कहीं हँसने पर गीर ना पड़े
या फिर,बहुत दिनों से ब्रश न किए गए
उसके दांतो को
कहीं मैं देख न लूँ
जो भी हो
कुछ डरते हुए और कुछ शर्माते हुए
वह मेरी बगल से निकलने लगी
मैंने फिर कहा –
“मेरा नाम जानती हो”
वह धीरे से बोली –
“नहीं जानती आप बताओ ना”

उसके जवाब से साफ जाहिर था
कि उसे पसन्द आएगी मेरी दोस्ती
मैं बहुत खुश हुआ,ये सोचकर
कि सफल हो रहे हैं मेरे इरादे
मैंने अपना नाम बताया –
“महेश”
वह चली जा रही थी
मैंने फिर कहा –
“महेश”
वह जोर से हँसते हुऐ,भागने लगी
मुझे लगा कि
शायद उसने मेरा नाम नहीं सुना
मैंने फिर आवाज़ लगाई
कुछ और जोर से
“महेश”
वह भागे जा रही थी
मैं देखे जा रहा था
फिर मैं तब तक वहीं खड़ा रहा
जब तक कि
वह आँखों से ओझल न हो गई ।।

                – महेश चौहान चिकलाना

Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Mahesh Chauhan Chiklana

लिखने का शौक है

Leave a Reply

Close Menu