बड़ा मज़ा मेरे गाँव में

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बड़ा मज़ा मेरे गाँव में

By |2018-04-17T18:37:21+00:00April 17th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

पीपल, बरगद के छाँव में
था बड़ा मज़ा मेरे गाँव में |
कहाँ से कहाँ ये गया जमाना
नहीं दिखता अब चीज़ पूराना
अब धुल न लगती पाँव में
था बड़ा मज़ा मेरे गाँव में |

धोती कुरता सब छूटा भाई
कमर बेल्ट लटकी गर टाई
टाईट जींस है पाँव में
था बड़ा मज़ा मेरे गाँव में |

बेना पंखी छुट गया सब
कूलर एसी जगह ले लिए अब
कहाँ खो गयी शुद्ध हवा अब , 
जो मिलती झुरमुट के छाँव में,
था बड़ा मज़ा मेरे गाँव में |

उपर-नीचे सेहत होती
स्वस्थ शरीर को आत्मा रोती
सब रोग-दोष की दवा है मिलती,
बड़े बुजुर्ग के पाँव में;
था बड़ा मज़ा मेरे गाँव में |

सादा सरल गाँव का जीवन,
भीड़-भाड़ और शहर में अनबन,
कितना पाए किसका ले लें,
सब अपने-अपने है दांव में;
था बड़ा मज़ा मेरे गाँव में |

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About the Author:

हिंदी से स्नातक, नेटिव प्लेस जौनपुर उत्तरप्रदेश कविता, कहानी लिखने का शौक

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