जिंदगी

ख़्वाबों का धूमिल हो जाना
फिर शिद्दतों के बाद उन्हें पाना
जिन्दगी इसी को कहते है
उड़ती है जिंदगी ख़्वाबों के सहारे
मिलते है शिद्दतों से किनारे
उम्मीद पे है दुनिया कायम
ना उम्मीदी तो हरातीहै
मुश्किलों में लाती है
ख्वाबों को बुन लो जरा
ख़्वाबों को चुन लो जरा
मिलते है शिद्दतों से किनारे

शालिनी जैन

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