हम तुम्हारे ना रहे

कभी किताबों का हिस्सा थे
जो गुलाब
जनाब अब वो जमाने ना रहे
देखने जाए जहां
इक नजर
महबूब के शहर-गली
योगी अब वो ठिकाने ना रहे
ना रहे जजबात वो
वो तेज धडक,धडकनो की
अपने ही हाथों योगी
अपने ही दिल को थामना
यारो आज के दौर मे
वो सहारे ना रहे
मौसम तो आते रहे
जाते रहे
जान मेरी अब
वो दिन पुराने ना रहे
हकीकत क्या ब्यां करे
हम तुम्हारे हो ना पाये
तुम भी हमारे ना रहे
                    -अंजना योगी

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