एक था बचपन

Home » एक था बचपन

एक था बचपन

एक  था  बचपन ,एक था  बचपन ,

भोला सा ,प्यारा  सा  ,नन्हा सा बचपन .

क्यों  हैवानियत का ग्रास बना  बचपन ?

 

वोह  नटखटपन ,वोह शोखियाँ और  शरारतें ,

वोह अल्हड़पन , वोह मस्ती  और  रूठने -मनाने की आदतें ,

किसने छीन ली  इसके चेहरे से मोहक मुस्कान ?

 

वोह पंछियों  की तरह स्वछंद  उड़ना  ,  खेलना -कूदना ,

एक डाल से दूसरी  डाल  में  बैठना,  नाचना  -गाना .

अब क्यों   गुमसुम सा   हो गया   यह   बिंदास   बचपन ?

 

माँ-बाप ,परिवर जनों  का  आँखों का  तारा  ,लाडला बचपन,

नाज़ करता ,अपनी छोटी-छोटी मांगे मंगवाता  जिद्दी  बचपन ,

क्यों   डर के  स्याह  अंधेरों  में  दुबक के बैठ गया बचपन?

 

बचपन  ने तो अब  ली ही थी  अंगडाई  नव कोमल तन  के संग,

नए सपनो  का जहाँ लेकर आँखें खोली थी -बड़ी-बड़ी आशाओं के संग,

क्यों एक खूंखार  बाज़  के पैने व् ज़हरीले पंजो तले दबोचा गया बचपन?

 

दुनिया  की  बदलती  निगाहे ,इन  ज़हरीली हवाओं से अनजान था  जो ,

इंसानों  में भेड़िये  जैसे   खूंखार भी लोग होते है ,नहीं जानता था जो ,

क्यों और कैसे शैतानो  के  हत्थे  चढ़ गया  वोह अबोध  बचपन ?

 

जिंदगी  के मायने जो अब तक ना  समझ सका,

मान-सम्मान, इज्ज़त  का मतलब भी  नहीं जान सका .

हाय ! क्यों इस तरह  बेआबरू हुआ  मासूम बचपन ?

 

बड़ी  उलझन है  हमारे दिल में  ज़रा हमें बताये  कोई ?

यदि नहीं बचाया गया  वेह्शी/दरिंदों से  हमारे देश के बच्चों को  ,

तो किसे कहेंगे देश का भविष्य ? और देश का भावी कर्णधार कौन होगा ?

 

अपने  ज़मीर  से पूछकर यह  सियासतदार  बताये तो ज़रा हमें  कोई.

आखिर  कब तक घुट-घुट कर जीता रहेगा  बचपन ?

या अमानवीय कृत्य का  शिकार हो तड़प-तड़प कर मरेगा  बचपन ?

 

किसी वेह्शी /दरिन्दे  के   पाशविक   कुकृत्य  का अभिशाप  सहता,

फ्राक  ,निकर   और  डायपर   पहना  हाय ! वोह भोला  ,मासूम, नन्हा  बचपन।

एक  था  बचपन !  एक था  बचपन !

कहाँ खो गया वोह मासूम  बचपन ?

Say something
Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

Leave A Comment