रिश्ते

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रिश्ते

By |2018-04-28T15:14:55+00:00April 28th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

दूर जाने से रिश्ते टूटा नहीं करते

गुस्से से मन का गुबार फूटा नहीं करते

लोगों का क्या है सिर्फ, एक बहाना चाहिए

यह बंधन है दिलों का इसे निभाना चाहिए

 

पुराने हो या नये, चोट कितने भी हो दिए

कोई रूठ जाता है कोई मान जाता है

उनके लिए दिल में प्यार है यह जताना चाहिए

यह बंधन है दिलों का इसे निभाना चाहिए

 

मुक्कदर में है तभी तो मिलते है

फुल रूपी रिश्ते तभी तो खिलते है

निःस्वार्थ भाव से मिलने आना चाहिए

यह बंधन है दिलों का इसे निभाना चाहिए

 

छोटी-छोटी बातों पे रूठ जाते है

अनजाने में उनसे हाथ छुट जाते है

वक्त के साथ झुक जाना चाहिए

यह बंधन है दिलों का इसे निभाना चाहिए

 

कोई नाम नहीं होता दिल से बने रिश्तों का

मोहताज नहीं ये झूठे प्यार के किस्तों का

सारी दुनियाँ को ये “राज” बताना चाहिए

यह बंधन है दिलों का इसे निभाना चाहिए

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About the Author:

हिंदी से स्नातक, नेटिव प्लेस जौनपुर उत्तरप्रदेश कविता, कहानी लिखने का शौक

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