आसरा

तरही गजल:-

आप का जबसे दर दूसरा हो गया।
आप के अस्क का आसरा हो गया।।

चोट दिल पर लगी थी मिरे इसलिए।
आज फिर जख्म मेरा हरा हो गया।।

नींद आती नहीं है मुझे रात भर।
चाँद जबसे मिरा सिरफिरा हो गया ।।

जिसका दिल टूटता है वो बेहाल है।
जान मारे बिना अधमरा हो गया।।

अब फिसलने का खतरा नहीं है मुझे।
रास्ता मेरा जब खुरदुरा हो गया।।
– जयराम राय

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