मैं तो सखी जन्मो की बिरहन
क्या बतलाऊं जिया की अग्न
क्षण पहर कैसे काटे रैन-दिन
उमरिया ठहरी मोरी पिया बिन
ए री आज संदेशवा आया है
हुलसाया है आज मेरा मन
–  अंजना योगी 

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