मेरा दर्द

Home » मेरा दर्द

मेरा दर्द

By |2018-05-08T22:44:20+00:00May 8th, 2018|Categories: अन्य|Tags: , , |0 Comments

मेरा दर्द न समझ सके तुम,
गैरों की क्या विशात है
फिर भी तोहमतें जो मुझपे करते हो
के बदल गए हो तुम ये कैसी चाल है
में ठहरा हुआ हुँ अब भी उसी राह पे
जरा मुड़ के देखो तो तुम कभी,
हमें आपका ही…
हाँ आपका ही अब भी इंतेज़ार है
शिकायतें भी हमसे, हैं फिर भी चाहतें इतनी
जो लायक नही हम तेरे तो
क्यों हैं हमसे उम्मीदें इतनी
सबके लिए वक़्त भरमार
तो क्यों मेरे लिए कमी इतनी
ये वक्त की बात
है तन्हाई और अकेलेपन का दर्द बहुत दुखदाई
ये दर्द मेरी ज़िंदगी का नहीं
अपनों की पहचान का हिस्सा है
अपना कहने वाले, मुझे कितना समझते हैैं
वो कहते हैं मुझे बदल गए हो तुम
जो खुद मुझे समझ न पाते हैं
हाँ कमियाँ बहुत सलीके से गिनाते हो
सच में जो कमियां है तो मुझे छोड़ दो मेरे हाल पे
जब दुनियां से ठोकरें मिलेंगी तो
संभल जाऊँगा या बिखर जाऊँगा
लेकिन याद रखना….
चाह कर भी न भूल पाओगे
इस कदर ज़िन्दगी भर याद आऊँगा
जो हम तेरी मोहब्बत के यू तलबगार न होते
तो इतना बेकरार न होते
हैं गलतफहमी कुछ दोनों की
दोनों आहत हैं फिर भी उम्मीदे हैं
गैरों से क्या शिकायत करना
हम तो अपने दिल से ही हारे हैं…………

   – सुबोध उर्फ सुभाष
06-05-18 10:34 AM

Say something
Rating: 4.0/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment

हिन्दी लेखक डॉट कॉम

सोशल मीडिया से जुड़ें ... 
close-link