पिता

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पिता पर लिखी गयीं कुछ पंक्तिया

” वो पिता होता है”

1.वो बूढ़ा होकर भी जवानों जैसी मेहनत करता है, जो बच्चो द्वारा की गई फरमाइश को चंद लम्हो मे ही पूरा करता है, जो बीमार होते हुए भी बीमार ना लगता है, वो पिता ही होता है।

2.कभी मोची बनकर , कभी कंडक्टर बनकर अनगिनत रूपो में वो दिखता है, पिता वो पेड़ होता है जिसके साये में छाव का सुखद एहसास होता है, जो बूढ़ा होकर भी बूढ़ा नही होता है, वो पिता होता है।

3.जो बेटी की शादी में हर किसी के हाथ जोड़ता है,वो बेटी की खुशी के लिये अपनी जीवन भर की कमाई न्यौछावर करता है, मेरी लाडली बेटी खुश रहेगी ये सोचकर जीता है , वो पिता होता है।

4.जो बेटी की विदाई में एक आँसू आँख में ना लाता है, बेटी की खुशी के लिए एक-एक पैसा जुटाता है,दहेज की मांग पर जो बेचैन हो जाता है,बेटी को विदा करके जो मन ही मन रोता है ,वो पिता होता है।

5. जो आर्थिक तंगी में भी घर मे एहसास ना होने देता है, जो चंद पैसो में भी बच्चो के लिए सबकुछ खरीदने का हौसला रखता है, जो बच्चों की फीस के लिये दर- दर भटकता है, वो पिता होता है।

6. जो डाट में भी प्यार जताता है, जो मेरे हर गम मे हर खुशी में साये जैसा साथ निभाता है, जिसका घर मे रहना ही सुखद एहसास करा जाता है, वो पिता ही होता है।

7. जो अपनी पुरानी चीजो को भी नयी बताता है, अभी तो खरीद कर लाया था इस कहकर अगली बार पर टाल जाता है, जो अपनी खुशियो की बलि चढाकर परिवार में अनगिनत खुशिया बाटता है, वो पिता ही होता है।

8.वो नर्म हृदय होकर भी आवरण सख्त होता है, जो बच्चों की खुशियों के लिए अपनी खुशियो को त्यागता है, जो बच्चों को डाटने पर खुद मन ही मन रोता है,वो पिता ही होता है।

9.जो उस पिता का आँचल कभी नही छोड़ता है, ईश्वर भी उसकी झोली खुशियो से भर देता है, पिता क्या होता है ये एहसास पिता बनने के बाद होता है,पिता अपने बच्चों की छांव के लिये भरी धूप में तपता है, कुछ भी कहो पिता जैसा ना कोई दूजा होता है, पिता पिता होता है।

✍🏼मयंक शुक्ला✍🏼 9713044668, 8770988241

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