तिलों की अदला-बदली

तिलों की अदला-बदली

By |2018-01-20T17:07:35+00:00January 17th, 2016|Categories: पंचतन्त्र|Tags: |0 Comments

एक बार की बात है कि वर्षाकाल आरम्भ होने पर अपना चातुर्मास्य करने के उद्देश्य से मैंने किसी गाँव के एक ब्राह्मण से स्थान देने का आग्रह किया था | उसने मेरी प्रार्थना को स्वीकार किया और मैं उस स्थान पर रहता हुआ अपनी व्रतोपासना करता रहा |

एक दिन प्रातःकाल उठने पर मुझे लगा कि ब्राह्मण और उसकी पत्नी में किसी प्रकार का विवाद उठ पड़ा है | मैं उसे ध्यानपूर्वक सुनता रहा | ब्राह्मण अपनी पत्नी से कह रहा था –“आज संक्रांति का दिन है | इस दिन मैं दूसरे गांव में दान मांगने जाऊंगा | तुम किसी ब्राह्मण को दानस्वरूप कुछ आहार करा देना |”

उसकी पत्नी बड़े कठोर शब्दों में उसे धिक्कारते हुए कहने लगी-“हम जैसे दरिद्र व्यक्ति के यहाँ भोजन मिलेगा ही कहाँ से ? अपने खाने-पिने का तो कोई प्रबंध नहीं है, ब्राह्मण को कहाँ से खिलाऊंगी |”

ब्राह्मण ने कहा-“तुम ठीक कह रही हो | अरी, अगर निर्धन व्यक्ति स्वभाव से दानी है, तो वह दान देता है, लेकिन कंजूस आदमी को भी कुछन कुछ यथायोग्य व्यक्ति को दान देना चाहिए | याद रहे, ज्यादा तृष्णा भी नहीं करनी चाहिए, और तृष्णा को पूरी तरह छोड़ भी नहीं देना चाहिए | जो बहुत ज्यादा तृष्णा करते हैं उनके माथे पर शिखा होती है |’

ब्राह्मण ने पूछा-“वह कैसे ?”

तब ब्राह्मण ने उसे यह कथा सुनाई |

Comments

comments

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 1
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    1
    Share

About the Author:

Leave A Comment