पहचान

कभी कोशिश तो करो

खुद को टटोलने को

कुछ नया जानने को

स्व को तलाशने को

 

अपने अहं को त्याग

कुछ लम्हे समटने को

दो पल गुजरो खुद संग

आनन्द में रहने को

 

हो जाओ मग्न ऐसे

सारा आकाश तुम हो

कुछ तत्व है धरा के

पहचान उनसे कर लो

 

दो फेंक बंधन के जाल को

सारे भ्रम को तोड़ दो

डूब जाओं एक क्षण को

अंतिम जैसे प्रहर हो

 

सारे धर्म को तज कर

प्रयास जो करो तुम

स्व का मिलन हो स्व से

एक कोशिश तो करो तुम…..

लेखक / लेखिकाडॉ. वंदना मिश्रा

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