प्रेम की इस आग में देखो

वन वन भटके अवध बिहारी

हर पल कैसे राह निहारे

कोमल सीता सुकुमारी

 

बनके जोगन घुमे मीरा

राजमहल सब त्याग

बावरी हो गयी है कैसी

दुलारी अपनी वृषभान

 

प्राण पियारी को तज के

जलते शंभू लटधारी

सती विरह में खोए हैं

शिव शंकर त्रिपुरारी

 

प्रेम की ऐसी माया है

जिसमे भूले भगवान

श्याम बने हैं नारी

ये प्रेम की है पहचान

लेखक / लेखिकाडॉ. वंदना मिश्रा

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