पुत्रमोह ही तो था कि बेटे की लालच में किशोरीलाल ने दुबारा शादी करने का फैसला लिया था । उसकी बीवी को पिछले महीने फिर से बेटी हुई, अब किशोरीलाल की चार लड़कियां हो गयी थी । बेटे की लालच में वो अब चार लड़कियों का पिता था लेकिन सिर्फ नाम का, क्योंकि पुत्रमोह में कभी पुत्रीप्रेम नहीं उपज सकता है ।
उसने अपनी बीवी और चारों लड़कियों को घर से बेघर कर दिया, गरीबी का आलम था तो ना ही पुलिस में रपट लिखी ना ही पंचायत जुटी । बेटियों को लेकर लाली अपने मायके आ गयी, कुछ दिनों में उसने झाड़ू पौछा कपड़े का काम दूसरों के यहाँ शुरू कर दिया । बड़ी बेटी भी मां की तरह एक दर्ज़ी के यहाँ काम करने लगी । इतना कमा लेती थी दोनों की भूखा ना सोना पड़े ।
उधर किशोरीलाल को एक बेघर औरत मिल गयी और उसने अपनी पहली शादी की बात छुपाकर दूसरी शादी कर ली । बेटे की चाह में उसने अपनी बीवी को रानी की तरह रखा, साल भर भी नहीं हुआ कि किशोरीलाल पांचवीं लड़की का बाप बन गया । इस बात पर उसने अपनी बीवी को बहुत पीटा तो उसकी बीवी घर में रखी नगदी और बच्ची को लेकर भाग गयी ।
शाम को घर लौटकर उसने खूब छानाबीनी की ना तो बीवी मिली ना ही पैसे । पुत्रमोह ने उसे ठग लिया था ।
— जयति जैन “नूतन”, भोपाल
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