उलझन

आज सुबह से ही नीलम परेशान थी ।हालांकि आज तो उसे खुश होना चाहिए था क्योंकि आज ही उसने नौकरी ज्वाइन किया था। लंच में एक शिक्षिका ने अलग ले जाकर उससे पूछ ही लिया ,क्या बात है ? क्यों परेशान हो ?
“नहीं ऐसे ही ।”नीलम थोड़ा झिझकी।
अरे बताओ ,मैं कोई गैर नहीं हूँ । बताने से ही
मन हल्का होता है ।
नीलम ने सारी बातें शुरू से अंत तक बता डाली ।
“कैसे हैं तेरे मामा जो नौकरी भी मजाक समझते हैं नौकरी वो भी सरकारी इतनी आसानी से कहाँ मिलती है ।” शिक्षिका ने कहा
अब नीलम की आँखों में केवल आँसू थे।
कोई नहीं उन्होने तेरे लिए घर का दरवाजा बन्द
किया है ,पर मैं हूँ ना ।यदि मुझपर विश्वास हो तो मेरे घर चल ।
पर नीलम नये शहर में नये लोग पर कैसे विश्वास करती ।स्वाभिमान उसे मामाजी के घर
जाने से भी रोक रहा था ।
छुट्टी का समय होने वाला था और नीलम की
धड़कने भी तेज हो रही थी कि अचानक बाहर
से एक बच्चा आया ,”नीलम मैम कौन हैं उनके
घर से कोई राजेश करके आया है ।”
नीलम की आँखों में खुशी के आँसू और चेहरे
पर चमक आ गयी । उसके पति घर से आ गये
थे ।अब उसे कहीं भी जाने की जरूरत नहीं थी।

डॉ.सरला सिंह

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

sarla singh

शिक्षण कार्य टी.जी.टी.हिन्दी खाली समय में लेखन कार्य।

Leave a Reply

Close Menu