ख्वाब

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ख्वाब

By |2018-05-19T22:58:36+00:00May 19th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

आंखे मूंदने पर जो ख्वाब योगी आता है
वो उम्र को काफी पीछे ले जाता है
जहां ना तो सफेदी होती है बालो में
अल्हड सी होती है मुस्कान लबों पर
चुरा लेते है नजरों को नजर अपनी से
बात लफ्जों से नही झुकी नजरों से होती है
वो लम्हा अब भी धडकने दिल की बढा जाता है

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