वृद्धाश्रम में

स्वजनों के लिए व्याकुल ,

आत्मीयता ढूँढते नेत्र ,

निःशब्द होते हुए भी

कुछ नहीं, बहुत कुछ

हमसे कह जाते हैं ।

मानो पूछते हैं !

गृहस्थाश्रम को महत्ता देकर

हमने कोई त्रुटि कर दी ?

सन्तान पर सर्वस्व न्योछावर

कर बड़ी भूल कर दी !

प्रेम व त्याग का

यदि यही है प्रतिफल ,

तो हमें देखकर

वात्सल्य-भाव के प्रति

विश्वास उठ जाएगा कल !!

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