यारी

Home » यारी

यारी

By |2018-05-21T22:30:04+00:00May 21st, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

गुनाह कुछ भी नहीं फिर भी सजा सारी है।
बता दो जिन्दगी ये हाल क्यों हमारी है।।

कभी कभी तो आसमाँ कहर बरसते हैं।
इधर जमाने के भी जुल्मों सितम जारी है।।

तमाम दिक्कतों के दौर से गुजरते हुए।
जिन्दगी फिर भी बड़े शौक से गुजारी है।।

बना हुआ है जो उसको बिगाड़ देते हैं।
ऐसे लोगों से निपटने की जिम्मेदारी है।।

हम अपनी प्यास को दर दर लिये भटकते हैं।
हमारी जब कि समन्दर से बहुत यारी है।।
**********************************
**जयराम राय **

Say something
Rating: 3.0/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment