जॉनी – रॉनी पकौड़ा सेंटर

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जॉनी – रॉनी पकौड़ा सेंटर

एक दिन जॉनी और रॉनी ने फैसला किया कि वे अपना खुद का बिज़नस शुरु करेंगे | आख़िर इतने सालों से बेरोजगार थे वे | नौकरी तो मिलने से रही | वैसे भी मंकी फॉरेस्ट में जिस तरह से बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ रही थी उसे देखते हुए नहीं लग रहा था कि उन्हें कोई नौकरी मिलने वाली | रॉनी तो खैर मैट्रिक फेल था, पर जॉनी ग्रेजुएट हो कर भी अब तक बेरोजगार था | कहने का मतलब एजुकेटेड हो या अनएजुकेटेड, जंगल में लगभग पूरी युवा पीढ़ी बेरोजगार थी | इसी वजह से दोनों मित्रों ने एक खुफ़िया बैठक बुलाई | मीटिंग आम के एक ऊंचे पेड़ की डाली पर शुरू हुई |

दोनों इस वक़्त आम के पेड़ पर बैठे हुए थे और गंभीरता से इस विषय पर चिंतन मंथन कर रहे थे |

”यार जॉनी, हमने प्लानिंग तो कर ली पर धंधा क्या शुरु करेंगे ये सोचा है?”- रॉनी बोला – “तुझे तो पता है मेरे पिताजी एक प्राइवेट फैकट्री में मज़दूरी करते हैं | उनकी सैलेरी इतनी नहीं है कि मुझे बिज़नस करने के लिए पूंजी दे सके और एक बढ़िया धंधा करने के लिए मोटी रकम भी चाहिए |”

“बात तो तेरी सही है” – जॉनी ने जवाब दिया – “पर मेरे पापा भी एक मज़दूर हैं | पैसे तो मैं भी इनवेस्ट नहीं कर सकता |”

” एक आइडिया है |”

“क्या?”

“क्यों ना हम चाय की दुकान खोल लें?” – रॉनी ने नसीहत दी – “यही एक धंधा है जो कम इनवेस्टमेंट में ज्यादा मुनाफा दे सकता है | और ये मत भूल की हमारे देश के पी.एम. भी कभी चाय बेचा करते थे | आज कहाँ से कहाँ पहुँच गए?”

“बिल्कुल ठीक बोल रहे हो | वैसे भी उन्होंने खुद ही एक बार मीडिया के सामने बेरोजगार युवाओं को पकौड़े बेचने की नसीहत दी थी | सेल्फ-एंप्लायमेंट |” – जॉनी ने भी चुटकी ली|

“यार, ये समय राजनैतिक बहस करने का नहीं है, अपने फ्यूचर के बारे में सोचने का है” – रॉनी थोड़ा खीझते हुए बोला |

“ठीक है, ठीक है | पर सिर्फ चाय बेचने से इतने पैसे नहीं आएंगे कि घर का सारा भार अपने माथे पर ले सकें | कुछ और भी आइटम्स रखने होंगे |” – जॉनी ने समझाया |

“वो तो रखेंगे ही” – रॉनी झट से बोला – “चाय के साथ समोसे और गरमा – गरम पकौड़े भी रखेंगे |”

जॉनी ने कुछ नहीं कहा, बस उसे देख कर मुस्कुराने लगा |

” स्माइल क्यों दे रहा है?” – रॉनी पूछ बैठा|

“गरमा – गरम पकौड़े! अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे |” – जॉनी मुस्कुराते हुए बोला |

रॉनी ने कुछ नहीं कहा | वह जॉनी की बात का मतलब समझ गया था |

अचानक से जॉनी बोल पड़ा – ” पर एक और भी प्रॉब्लम है यार|”

“अब क्या प्रॉब्लम है?”

“तू |”

“मैं?”

“हाँ,” – जॉनी बोला – “तुझे तो समोसे और पकौड़े बहुत पसंद है | दुकान में बैठे – बैठे आधे पकौड़े तो तू ही डकार जाएगा|”

जॉनी ने ये बात रॉनी की घड़े की तरह बाहर निकली हुई तोंद को देखते हुए कही थी | जहां एक और जॉनी हद से ज्यादा पतला – दुबला था, तो वहीं दूसरी ओर रॉनी एकदम मोटा और फूला हुआ था |

जॉनी की बात पर रॉनी ने हंसते हुए कहा – “नहीं यार, बिज़नस में पहले बिज़नस, पेट पूजा बाद में |”

“एक प्रॉब्लम और भी है |” – जॉनी फिर बोल पड़ा |

“अब क्या?”

“दुकान तो हम खोल लेंगे और चाय भी मैं बना दूंगा, पर समोसे और पकौड़े कौन बनाएगा? मुझे तो ये सब बनाना नहीं आता |” – जॉनी ने कहा |

“बनाना तो मुझे भी नहीं आता, पर एक उपाय है |” – रॉनी बोला |

“क्या?”

“हम स्टाफ रख लेंगे |”

“भाई तू इंकम कितना करेगा की स्टाफ को तनख्वा देगा? ” – जॉनी ने रॉनी का मज़ाक उड़ाया |

“वो तू मेरे ऊपर छोड़ दे | कोई न कोई तो मुर्गा फँस ही जाएगा जो कम सैलेरी में काम करेगा |” – रॉनी ने जॉनी को कंवींस करता हुआ बोला |

“मुर्गा?”

“अरे भई, तुझे तो पता है दूसरों को टोपी पहनाने के मामले में मेरा नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है | कोई न कोई बेवकूफ तो मिल ही जाएगा | चल अब किसी मूर्ख को ढूंढते हैं |”

फिर फौरन दोनों दोस्त किसी मूर्ख की तलाश में निकल पड़े|

आधा घंटा इधर-उधर भटकने के बाद ही उन्हें दो मूर्ख बंदर दिखाई पड़ गए | वे दो बन्दर सोनू और मोनू थे | जॉनी-रॉनी समेत पूरा जंगल जानता था कि ये दो दोस्त दिमाग से पैदल हैं | दोनों को ही राजनीति में बहुत इंटरेस्ट था और दोनों ही जब-तब हाथों में बैनर लिए जंगल में घूमते दिखाई पड़ जाते थे |

इस वक़्त दोनों हरी-हरी घास पर बैठे हुए थे और जंगल में होने वाले इलेक्शन के बारे में ही बातें कर रहे थे | उनकी बातें सुनने के लिए रॉनी जॉनी को खींच कर पेड़ की आड़ में छुप गया |

“तो तेरे कहने का मतलब मैं चुनाव नहीं जीत सकता?” – मोनू बोल रहा था |

“जीतेगा तब न जब तुझे कोई चुनाव में उतरने देगा |” – सोनू ने कहा |

“कौन रोकेगा मुझे? इस बार मैं चुनाव जीत कर दिखाऊँगा | आकाश-पाताल एक कर दूँगा | देखना अगले साल के आम चुनाव में हमारी पार्टी ही जीतेगी |” – मोनू ने पूरे जोश के साथ कहा और खड़े हो कर नारे लगाने लगा – “युनाइटेड मंकी पार्टी, ज़िन्दाबाद – ज़िन्दाबाद |”

” एक मिनट, एक मिनट मेरे भाई |” – सोनू ने बीच में दखल दिया – “तू ये क्यों भूल जाता है कि हम बन्दर हैं, बन्दर, शेर नहीं | और ये मत भूल की जंगल का राजा शेर होता है, बन्दर नहीं |”

“तेरे में सोनू, यही एक कमी है| तू कभी हटकर नहीं सोचता | बन्दर हैं तो क्या सिर्फ़ पूंछ का ही इस्तेमाल करेंगे, दिमाग का इस्तेमाल नहीं कर सकते? अरे इंसान को देख, कभी हमारी तरह ही बन्दर थे | आज वो इंसान बन गए और हम बन्दर के बन्दर ही रह गए क्योंकि उन्होंने अपनी पूंछ का इस्तेमाल बंद कर दिया और दिमाग़ का इस्तेमाल करने लगे | हम बन्दर ही रह गए क्योंकि हम आज भी तेरी तरह दिमाग की बजाय अपनी पूंछ का इस्तेमाल करते हैं |”

सोनू ने कुछ जवाब नहीं दिया, बल्कि अपना सर खुजलाने लगा |

पेड़ की आड़ में छुपा जॉनी – रॉनी ये सब देख रहा था |

“कुछ समझ में आया, जॉनी?” – रॉनी ने जॉनी की कान में फुसफुसाते हुए कहा |

“हाँ,” – जॉनी भी फुसफुसाते हुए बोला – “दिमाग से पैदल मालूम पड़ते हैं दोनों |”

“हाँ, पर ये हमारे बहुत काम आ सकते हैं | चल इन्हें टोपी पहनाया जाए |”

” पर क्या ऐसा करना सही होगा? “- जॉनी ने थोड़ा टेंश होते हुए कहा |

” यार तू सही – गलत बहुत सोचता है | मैं तो चला अपने मिशन पर |” – इतना कह कर रॉनी पेड़ के पीछे से निकल कर सोनू और मोनू के सामने जा कर खड़ा हो गया | मज़बूरी में बेचारे जॉनी को भी उसके पीछे जाना पड़ा |

सोनू और मोनू में वार्तालाप जारी था |

“इसलिए मैं बचपन से सोचता आ रहा हूँ कि इंसान बन्दर से इंसान बन गए पर हम क्यों बन्दर रह गए ? आखिर डार्विन की थ्योरी गलत कैसे हो सकती है ?” – सोनू बोला |

“इसलिए कहता हूँ मेरी बात…….”, मोनू आगे कुछ और भी कहने जा रहा था कि बीच में रॉनी टपक पड़ा |

“माफ़ करना भाई लोग, मैं तुमलोगों के पर्सनल मैटर में दखल तो देना नहीं चाहता पर मेरे पास एक प्लान है जिससे तुम चुनाव जीत सकते हो? ” – सोनू ने पानी में जाल फेंका | बस मछली फंसने की देर थी |

” कैसे? जरा हमें भी तो बताओ अपना प्लान |” – मोनू झट से बोला |

रॉनी – “तुमलोग चुनाव जीतना चाहते हो न?”

मोनू – ” हाँ |”

रॉनी – “जंगल का राजा बनना चाहते हो?”

मोनू – “हाँ |”

रॉनी – “पर जब तक जंगल का राजा शेर है, तुम राजा नहीं बन सकते |”

“क्यों नहीं बन सकते?” – मोनू गुस्से से बोला |

“क्योंकि जंगल के राजा शेर के पास जनता का समर्थन है | जंगल के ज्यादातर जानवर चाहते हैं कि वे ही राजा रहे | अगर तुम उसे हराना चाहते हो तो पूरे विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा |” – रॉनी ने उसे समझाया |

“बस बहुत हुआ ये ‘शेर-शेर’ का खेल| अब तो बन्दरों का शासन आएगा | और बेवकूफो तुम सब ये क्यों भूल जाते हो कि हमारे जंगल का नाम ‘मंकी फॉरेस्ट’ है, और मंकी फॉरेस्ट में बंदरों का ही शासन होना चाहिए |” – इतना कह कर मोनू ने फिर से नारा लगाना शुरू कर दिया – “यूनाइटेड मंकी पार्टी, ज़िन्दाबाद – ज़िन्दाबाद |”

अब बीच में फिर से सोनू ने दखल दिया – “चुप कर | बहुत नारे लगा लिया | तू ये क्यों भूल जाता है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां सभी को समान अधिकार दिए गए हैं | इसलिए मंकी फॉरेस्ट में कोई भी राजा बन सकता है, फिर चाहे वो मंकी हो या शेर, हाथी हो या चींटी |”

“ये भारत देश कहाँ है?” – मोनू ने सवाल किया |

“शेम ऑन यू, मोनू, शेम ऑन यू! जिस देश में रहता है उस देश का नाम तक नहीं पता तुझे | चाय की केतली में डूब मर | जिस मंकी फॉरेस्ट का तू राजा बनना चाहता है वो भारत देश में ही है | जिस तरह कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, उसी तरह मंकी फॉरेस्ट भी भारत का अभिन्न अंग है |” – सोनू ने मोनू को डाँट लगाई | उसकी आँखों में इस वक़्त देशप्रेम से ओत-प्रोत आँसू थे |

“मैं भारत में नहीं रहता, मैं मंकी फॉरेस्ट में रहता हूं |” – मोनू ने सोनू के जख्म में नमक छिड़का – “आख़िर भारत ने हमारे लिए क्या किया है? हम किस हाल में जीते हैं, किस हाल में सोते हैं, ये देखने तो कोई नेता नई दिल्ली से नहीं आता | हाँ, चुनाव से पहले ग़रीब के घर खाना खाने जरूर आते हैं, वो भी सिर्फ़ दिखावे के लिए, वोट बैंक के लिए | मैं पूछता हूँ कि ये नेता ग़रीब के यहां खाने क्यों जाते हैं, उन्हें खिलाने क्यों नहीं जाते | यहाँ फॉरेस्ट माफिया और पोर्चर हमारे जंगल को खोखला कर रहे हैं, जंगल में न बिजली की सुविधा है और न ही सड़क की, बेरोजगारी अपने चरम पर है, इंसान जंगल काट कर अपना घर बसा रहे हैं और हमारा घर उजाड़ रहे हैं | इन्हीं सब वजह से जनता के मन में आक्रोश और नफरत पैदा होता है जिसका फायदा अलगाववादी और आतंकवादी उठाते हैं और हमारे देश के युवा क्राइम की दुनिया में चले जाते हैं |”

मोनू ने ये सारी बातें एक ही साँस में कह दी | कुछ पल के लिए वहां खामोशी छा गयी | किसी ने कुछ नहीं कहा | सभी को मोनू की बात में दम नज़र आया | फिर बात की शुरुआत जॉनी ने की – “मोनू ब्रदर, बात तो तुम्हारी हंड्रेड परसेंट सही है, पर ये सब बातें किसी और के सामने मत कहियो वरना तुम्हें देशद्रोही का सर्टिफिकेट दे कर पकिस्तान भेज दिया जायेगा |” – जॉनी ने मोनू को राष्ट्रीय राजनीति की थोड़ी जानकारी दी |

“पाकिस्तान! अरे मुझे जाना ही होगा तो मैं अमेरिका चला जाऊँगा | सुना है वहाँ इंसान के साथ – साथ जानवरों की लाईफ भी बहुत अच्छी है |”

उन सब में यूं ही बहस चल रही थी, पर इधर रॉनी के शरारती दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था| लिहाजा बीच में फिर टपक पड़ा – “भाई लोगों, ये समय राजनैतिक बहस करने का नहीं है, अपने फ्यूचर के बारे में सोचने का है | आख़िर कब तक इस तरह हाथ में झंडे लेकर घूमते रहोगे | कुछ ऐसा करो कि साँप भी मर जाए और लाठी भी ना  टूटे |”

” मतलब ? ” – सोनू और मोनू ने एक साथ सवाल किया |

“मतलब कुछ ऐसा करो कि तुम्हें चुनाव भी ना लड़ना पड़े और तुम जंगल का राजा भी बन जाओ |” – रॉनी ने मछली फंसाने के लिए जाल फेंका |

“क्या सच में ऐसा हो सकता है | प्लीज मुझे बताओ| मुझे तो राजा साहब के खिलाफ चुनाव लड़ने में बहुत डर लग रहा है | कहीं टपका न दे ?” – सोनू झट से रॉनी के पास आ कर बोला |

“हुँह, ऐसा भी होता है क्या ? भला कोई चुनाव लड़े बिना कुर्सी पर कैसे बैठ सकता है ? – मोनू ने रॉनी का मज़ाक उड़ाया |

” हाँ, हो सकता है”, जवाब जॉनी ने दिया – “जब यू.पी. का सी.एम. बिना चुनाव लड़े यू.पी. का सी.एम. बन सकता है तो तुम मंकी फॉरेस्ट का किंग क्यों नहीं बन सकते ?”

” पर ये होगा कैसे ? – मोनू बोला |

“चाय बेच कर |” – रॉनी ने जवाब दिया |

“चाय बेच कर !” – सोनू और मोनू दोनों के मुँह से एक साथ निकला |

“हाँ”, रॉनी बोला – “अपने पी.एम. को देखो| कभी चाय बेचा करते थे आज कहाँ से कहाँ पहुँच गए | हमारे पी.एम. चाय बेच कर 2 जी की स्पीड से पी.एम. बने, हम चाय के साथ पकौड़े भी बेचेंगे और 4 जी की स्पीड से जंगल का राजा बन जाएंगे |”

सोनू और मोनू ने एक दूसरे की तरफ़ देखा |

“सोच क्या रहे हो सोनू – मोनू ? मुनाफ़े का सौदा है | ऐसा गोल्डेन ऑफ़र हर कोई नहीं देता |” – रॉनी दोनों को कंविंस करने की कोशिश करता हुआ बोला |

कुछ देर तक तो मोनू कुछ सोचता रहा, फिर बोला – “ठीक है, पर राजा की कुर्सी पर मैं ही बैठूँगा |”

मोनू की इस बात पर तो रॉनी को बड़े जोर की हँसी आई, पर अपनी हंसी को छुपाता हुआ बोला – “ऑफकॉर्स यार, हमें तो बस तुम्हारे यहाँ एक सरकारी नौकरी ही मिल जाये तो बहुत है | क्यों जॉनी, है न ?”

“हाँ…..हाँ…… सही कहा | हमें सत्ता का लोभ नहीं |” – जॉनी ने भी रॉनी की हाँ में हाँ मिलाई और फिर चाय और पकौड़े की दुकान खोलने का बिल सर्वसम्मति से पारित हो गया |

बिल पास होने की देर थी कि फटाफट उस पर काम भी शुरू हो गया | जंगल के मेन रोड के मोड़ पर चारों ने बाँस की एक छोटी- सी दुकान बनायीं और उसके ऊपर एक बोर्ड लगा दिया गया – ‘जॉनी – रॉनी पकौड़ा सेंटर’ |

जैसी की डील हुई थी, जॉनी और रॉनी मालिक थे और सोनू – मोनू स्टाफ, क्योंकि पैसा जॉनी – रॉनी ने ही इन्वेस्ट किया था | रॉनी कैश काउंटर पर बैठ गया और जॉनी ने कस्टमर्स को चाय और खाने की चीजें सर्व करने का काम संभाल लिया |मोनू को कुकिंग अच्छी आती थी, सो उसे चाय और पकौड़े बनाने का काम दिया गया | और मोनू, बेचारे मोनू को जूठे कप और चाय की केतली धोने का काम मिला |

चारों की मेहनत और आत्मविश्वास ने रंग लाया और देखते ही देखते उनका बिज़नस 4 जी की स्पीड से चलने लगा और मुनाफ़ा भी देने लगा | इसका कारण था कि पूरे जंगल में सिर्फ़ दो ही चाय और पकौड़े की दुकान थी और इन्होंने ये तीसरी दुकान खोली थी | साथ ही जॉनी – रॉनी के समोसे और पकौड़े साइज़ में बड़े भी होते थे और खाने में टेस्टी भी |लिहाजा धंधे का जमना कोई चौंकाने वाली बात नहीं थी |

पर जैसा कि अक्सर होता है जब कोई इंसान तेजी से तरक्की करने लगता है तो सभी उससे जलने लगते हैं | ये बात जानवरों में भी लागू होती है | जॉनी – रॉनी का धंधा क्या जमा दूसरे बन्दर उनसे जलने लगे |

उन जलने वाले बन्दरों में दो बन्दर गोलू और मोलू भी थे | ये दोनों हमेशा जॉनी और रॉनी से जलते थे और उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहते थे | जैसे ही उन्हें पता चला कि जॉनी और रॉनी ने अपनी दुकान खोली है और खूब पैसा कमा रहे हैं, जल – भून गए और तुरंत दोनों ने फैसला किया कि वे भी अपना बिज़नस शुरु करेंगे चाय और पकौड़े का |

बस फिर क्या था, दोनों ने दूसरे ही दिन जॉनी और रॉनी की दुकान के सामने ही अपनी दुकान खोल ली | उन्हें अपनी दुकान के सामने ही सेम चीज़ों की दुकान खोलते देख रॉनी ने टोका भी – “भाई गोलू – मोलू, अगर तुम लोगों को दुकान ही खोलनी है तो किसी और जगह खोलो न| एक ही जगह एक ही चीज़ की दुकान खोलने से ना तो तुम्हें ठीक मुनाफ़ा होगा और ना ही हमें |”

पर गोलू ने उल्टे उसे ही झड़प लगा दी – “ये सड़क क्या तेरे बाप की है ? तुझे कोई प्रॉब्लम है तो अपनी दुकान उठा कर कहीं और ले जा, वरना तेरी ये दुकान भी बंद करवा देंगे |”

रॉनी के कुछ कहने से पहले ही जॉनी ने उसे रोक दिया और उसे समझाया – “छोड़ न|वो जो कर रहा है उसे करने दे | तुझे तो पता है ये दोनों पार्टी-पॉलिटिक्स भी करते हैं, क्लब में भी इनकी धांधली चलती है और राजा साहब की पार्टी लायन पार्टी ऑफ द फॉरेस्ट के भी ये मेंबर्स हैं | इनसे दुश्मनी मोल लेना सही नहीं |”

सोनू – मोनू ने भी जॉनी की बात का समर्थन किया |

“तू टेंशन मत ले रॉनी भाई |” – मोनू बोला – “एक बार मुझे जंगल का राजा बन जाने दे, फिर इन्हें सबक सिखाऊँगा| सारी धांधली बंद करवा दूँगा |”

बेचारा रॉनी खून का घूँट पी कर रह गया | इतना मोटा और बलशाली होना भी कुछ काम ना आया | उनके सामने ही उनके दुश्मनों ने अपनी दुकान खोल ली थी |

गोलू और मोलू ने क्या दुकान खोली, पूरे जंगल में चाय और पकौड़े की दुकान खुलने लगी | इसका कारण यह था कि जब गोलू और मोलू ने दुकान खोली तो उनके प्रतिद्वंद्वी जल गए और उन्होंने भी चाय और पकौड़े की दुकान खोल ली | इस तरह किसी ने जलन से, तो किसी ने देखा देखी प्रॉफिट कमाने के लिए दूकान खोल ली | कुछ बेरोजगार युवाओं को लगा कि नौकरी तो मिलने से रही, क्यों न जॉनी और रॉनी की तरह दुकान ही खोल ली जाए और उन्होंने भी पकौड़े की दुकान खोल ली |

अब हालात ये हो गए कि जंगल में पेड़ से ज्यादा पकौड़े की दुकान हो गयी | जंगल में पेड़ कम और पकौड़े की दुकान ज्याद नज़र आने लगी | इतना ही नहीं जंगल के जानवर पकौड़े और समोसे खा कर जूठे पत्ते और कागज़ इधर-उधर फेंकने लगे जिससे जंगल में कूड़ा – करकट भी जमा होने लगा | इन जानवरो का कहना था कि जब इंसान ही खा कर पत्ते, कागज़ और पैकेट इधर-उधर फेंकते हैं तो हम क्यों नहीं फेंक सकते ? आख़िर भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में सब को समान अधिकार दिए गए हैं |

इधर ये रिपोर्ट जब राजा साहब तक पहुंची तो वे गुस्से से दहाड़ पड़े | इतना सब कुछ हो गया और उन्हें अब खबर दी गयी है | तुरंत मिस्टर लायन ने कैबिनेट मंत्रियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई | मीटिंग में मि. लायन को पता चला कि जंगल के जानवर पकौड़े खा कर जंगल को तो गन्दा कर ही रहे हैं, साथ ही कई जानवर बीमार भी पड़ रहे हैं |सभी को पेट संबंधी समस्याएँ हो गयी हैं और बहुतों को इलाज के लिए पड़ोस के जंगल में जाना पड़ रहा है क्योंकि हमारे यहां डॉक्टर भी कम हैं और मेडिकल फैसिलिटी भी | जंगल में पेड़ और पशु – पक्षियों से ज्यादा पकौड़े की दुकान हो गयी है, सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है क्योंकि दोनों तरफ सिर्फ़ पकौड़े की दुकान ही दुकान है |अगर यही हालात रहें तो लॉ एंड ऑर्डर खतरे में पड़ सकता है |

मि. लायन को याद आया आज तक तो उन्होंने मेडिकल के क्षेत्र में कुछ किया ही नहीं और ना ही रोजगार के क्षेत्र में | पाँच साल तो बस भाषणबाज़ी और चुनाव प्रचार में ही गुजर गए | फिर भी वे थे तो राजा ही, कुछ न कुछ तो फैसला सुनाना ही था| फौरन उन्होंने अध्यादेश जारी कर दिया – आज से पकौड़े और समोसे बेचना कानूनन अपराध होगा | अगर कोई समोसे और पकौड़े बेचता हुआ पकड़ा जाता है तो उसे पाँच साल की सजा और दस हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगेगा, और खरीदने वाले को दो साल का कारावास और पाँच हज़ार रुपए का जुर्माना लगेगा |

मीटिंग ख़त्म होने के तुरंत बाद ही टाइगर पुलिस फोर्स पकौड़े की दुकानों पर रेड डालने के लिए निकल पड़ी | इतना ही नहीं ख़ुफ़िया विभाग की सारी लोमड़ी एजेंट को भी इस काम में लगा दिया गया कि कहीं कोई चोरी छिपे तो पकौड़े का धंधा नहीं कर रहा है | जंगल के हर पेड़ पर नोटिस चिपका दिया गया – ‘पकौड़े बेचना और खरीदना कानूनन अपराध’ |

ऐसा ही एक नोटिस जॉनी – रॉनी की दुकान के सामने भी एक पेड़ पर लगा दिया गया |

“रॉनी, कुछ नई बात पता चली ?” – जॉनी बोला |

” कौन-सी नई बात ? “- रॉनी अंजान बनता हुआ बोला |

” सामने के पेड़ पर लगे नोटिस को पढ़ |”

“पढ़ चुका हूँ |” – रॉनी बोला |

“मुझे तो पहले से ही पता था ये धंधा नहीं चलने वाला” – जॉनी बोला – “जब सारे जानवर ही पकौड़े बेचने लगेंगे तो जंगल में पकौड़े खरीदेगा कौन ? अब तू ये सोच अब क्या करें ?”

“करना क्या है, वही करेंगे जो हमारी सरकार चाहती है, धंधा बंद | सरकार खुद तो बेरोजगारों के लिए कुछ करेगी नहीं और ना ही हम बेरोजगारों को खुद से कुछ करने देगी |”

“वो सब तो ठीक है पर सोनू और मोनू को क्या जवाब देंगे ?” – जॉनी बोला |

“वो सब तू मेरे ऊपर छोड़ दे |तुझे पता है न कि टोपी पहनाने के मामले में मेरा नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ है ?” – रॉनी ने कहा |

“और तुझे शायद नहीं पता कि डंडे मारने के मामले में मेरा नाम भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ है |”

ये आवाज रॉनी के ठीक पीछे से आई थी | उसने आहिस्ता से अपने सर को पीछे मोड़ कर देखा और जो कुछ उसने देखा उससे उसके होश ही उड़ गए |

मोनू सच में हाथ में एक मोटा डंडा लिए खड़ा था और गुस्से से रॉनी को ही देख रहा था |

“पकौड़े की दुकान खोलने का आइडिया किसका था ?” – मोनू गुस्से में बोला |

जॉनी ने कुछ नहीं कहा, बस कांपते हाथ से रॉनी की तरफ इशारा कर दिया उसने | मोनू के हाथ में डंडा देख कर उसकी भी हालत पतली हो गई थी |

जॉनी को ऐसी सिचुएशन में वहां से नौ दो ग्यारह होने में ही भलाई नज़र आई | सो झट से कुर्सी से जंप लगाई उसने और सिर पर पाँव रख कर भागा |

“रूक जा रॉनी |कहाँ भागता है ? मेरे दो महीने की सैलरी दे कर जा, वर्ना तुझे छोड़ूंगा नहीं मैं |” – चिल्लाता हुआ मोनू भी उसके पीछे भागा | उसके हाथ में अब भी डंडा था |

इधर जॉनी और सोनू , रॉनी और मोनू को भागता हुआ देख रहे थे और खड़े – खड़े मुस्कुरा रहे थे |

जॉनी और रॉनी के पकौड़े का धंधा भी ठीक उसी तरह ठप्प हो गया था जैसे भारत – पाक शांति – समझौता सीमा पर सीज़फ़ायर का उल्लंघन होने पर ठप्प हो जाता है | बेचारे जंगल के सारे बेरोजगार भी बेरोजगार ही रह गए| जॉनी खड़ा – खड़ा मुस्कुरा रहा था और यही सोच रहा था – “क्या होगा मेरे देश का…..मेरा मतलब मेरे जंगल का ?”

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