दिल धडका

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दिल धडका

By |2018-05-30T22:02:07+00:00May 30th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

यारब आज फिर दिल धडका
वो बचपन की शरारतें याद आई
वो किले की सडक से साईकल को
रफ्तार तेज से छोड देना
आंखे जोर से बंद कर लेना
सोच कर यह अब तो टक्कर हुई के हुई
रोज की खरची से छुट्टियों मे
दोपहर को टाफियां,बिस्कुट,ढेर सारी चीजें ले
अपनी सहेलियों के संग पार्क जा
पिकनिक का मजा
याद कर यारब आज फिर दिल धडका
गोल गोल टुकुर टुकूर आंखो से
डैडी का कचहरी से आने का
रास्ता देखना
फिर आने पर उनके हाथों से
थैला लेकर सारे आमो को
डरम मे उलट कर
बडे छोटे का हिसाब लगाना
डैडी की वो डपट मेरे बाप
सारे तेरे हैं
याद कर यारब आज फिर दिल धडका
टेबल फैन को अपनी चारपाई पर
करने की भाई बहन की लडाई
वो आंगन मे टी वी पर रात भर
तीन तीन वी सी आर की फिल्मे
देखने को यारब आज फिर दिल धडका
जरा सा उदास होने पर
झट छत पर से सामने वाले पीर बाबा
को देख कर शुकून पा जाना
ना जाने आज फिर योगी
सजदा करने को दिल धडका
गर्मियां आने पर फिर से
मायके जाने को दिल धडका

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