लब कह न सके

लब कह न सके जो हाल सखी
आँखों ने वो हाल बयाँ कर दी,
रह गई कसर जो कहीं कोई
अश्कों ने कसर पूरी कर दी।

कपाट उस हिय के बंद रहे
खुशियों से सदा जो रिक्त रहा,
आँखों की नमी को पीकर के
होठों की मुस्कान न खोने दी।

दुनिया की फिकर की हमने सखी
अपनी न खबर कभी होने दी,
ठोकर जो लगी कभी राहों में
आँखों को न अपने रोने दी।

लब कह न सके जो हाल सखी आँखों ने वो हाल बयाँ कर दी।
#मालतीमिश्रा

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Malti Mishra

नाम-मालती मिश्रा शिक्षा- परास्नातक (हिन्दी) जन्म स्थान- बस्ती, उत्तरप्रदेश वर्तमान निवास- दिल्ली कार्यक्षेत्र- अध्यापन, लेखन

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