अपनी ही शर्तों पर मैंने करार कर लिया

जाने अनजाने में उससे प्यार कर लिया

 

कभी ठहरा न था किसी अंजान खातिर

पर न जाने कैसे उसका इंतजार कर लिया

 

मेरे आंगन में चांद निकल आया था, तो

उस अनंत सत्ता का मेंने आभार कर लिया

 

राही को राह जब मिल ही गयी तब

सफर न जाने कितनी बार कर लिया

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