एक पत्र पेरेंट्स के लिए

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एक पत्र पेरेंट्स के लिए

हैलो पेरेंट्स …

बच्चों की  परवरिश को लेकर मुझे  कुछ  कहना है। आपके बच्चों को आप जैसा बनाते हैं, वह कुछ वर्षों की कड़ी मेहनत का  परिणाम है। यह एक तरह की  जीवनबीमा  पॉलिसी है। इसमें आपने जो  निवेश किया है वही आपको  रिटर्न होगा। आपके वृद्धावस्था के लिए भी। अगर आप अपने बच्चों को, मात्र कुछ सालों की अच्छी  परवरिश देंगे, तो वह आपके लिए तो आजीवन अच्छे रहेंगे ही, समाज में भी आपका नाम  रोशन करेंगे। वृद्धावस्था में भी रोने की स्थति नहीं होगी। जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी। आपके बच्चों से जिनकी शादी होगी, पति या पत्नी उनकी भी आपको दुआएं, सम्मान मिलेगा। अब ये आप की इच्छा है,आप केवल  भोगी बनकर ही जीना चाहते हैं, या समाज को भी एक  सभ्य  व्यक्तित्व देना चाहते हैं।

आपने एक कहानी तो सुनी ही होगी। एक मां होती है। वह अपने बेटे को बहुत प्यार करती थी। बेटा निकम्मा, चोरी, शराब सब गलत काम करना सीख गया। किन्तु मां ने कभी उसे टोका, समझाया ही नहीं, अपितु मां उसके कार्यों पर पर्दा डालती रही। बेटा खुश था कि, देखो मेरी मां जितना कोई मां अपने बच्चे को प्यार नहीं करती। समय गुजरा, एक दिन चोरी के आरोप में बेटे को पुलिस पकड़ कर ले गई, उसको सजा सुनाई गई। उस बेटे से अपने बचाव के लिए पूछा गया, कुछ कहना चाहते हो तो कहो। बेटे ने उत्तर दिया, मुझे कुछ नहीं कहना बस एक बार मैं अपनी मां से मिलना चाहता हूं। मां मिलने पहुंची, बेटे के हाथ  बंधे हुए थे। बेटे ने कहा, मां इधर आओ, आपसे  कान में कुछ कहना है। जैसे ही मां ने अपना कान, सुनने के लिए उसके मुंह के पास किया, बेटे ने जोर से मां के कान को  काट  खाया। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत छुड़ाया एवं इसका कारण पूछा। बेटे ने जवाब दिया, वो ही मेरा कहने का  मूल  उद्देश्य है। बेटे ने कहा – काश!!! मां ने अगर मुझे  शुरू में ही, जब मैंने पहली बार चोरी या गलत कार्य किया था, उसी वक़्त मुझे डांटा या  समझाया होता तो आज ये नौबत नहीं आती। हमेशा मेरी गलतियों पर पर्दा डालती रही। और मैं भी उसे ही प्यार समझता रहा। आज जिस जगह पर मैं खड़ा हूं, उससे आगे मेरा कोई भविष्य नहीं है। उसी  परवरिश का नतीजा है कि इस समय, जब कि मां को मेरी जरूरत होगी मैं जेल में बंद रहूंगा, तथा समाज में भी अपयश के भागी बनेंगे। अब आप  समझ चुके होंगे, हो सकता है  आज  परवरिश के समय बच्चे आपसे नाराज हो सकते हैं, कोई बात नहीं। आज की परवरिश कड़वी दवा बेशक लगे,लेकिन भविष्य सुखदाई होगा। अन्यथा इस समय का  झूठा  लाड़प्यार बच्चे की जिंदगी  तबाह कर सकता है। और दोष देंगे आने वाली बहू या दामाद को। इसलिए बच्चों के गलत कार्यों पर  ना कहना भी सीखिए।
जितने भी  महापुरुष हुए हैं, उनकी प्रेरणा स्त्रोत उनके मातापिता ही रहे होंगे, यह एकदम सत्य वचन है,और बच्चों के बिगड़ने में भी घर की ही महती भूमिका है।

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