काजल

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काजल

विषय – काजल
विधा – दोहे ।

बंकिम नैना रस भरे , मोह लिया संसार ।
देखे काजल मुग्ध से , भरते आह हजार ।।१

नैन झलक चित मे बसी , कोमल किसलय डार ।
भीतर अंजन रेख सी , भरती रस अंबार ।।२

काजल नैना परखियाँ , रही घनी पहचान ।
सूक्ष्म रेख बोझिल घनी,अंग मोम अनुमान।।३

सुखद समय भूला नही, सौरभ सुन्दर काल।
विरह व्यथा लागी लगन ,काजल बरसे गाल।।४

परिचय रस अंबार से , काजल करती बात ।
नैनन नेही निरखिया , नेह मर्म कहि जात ।।५

रूप गंध मन से बही , नैनन काजल धार ।
मोह लहर टकरा रही, सागर छलके नार ।।६

नैना उन्मादी हुए , देखा मधुकर प्यार ।
गहरे रस की गागरी, नभ तरंग विस्तार ।।७

देह मोह सरिता बढे , जीवन के दिन चार ।
मौत काल अनंत घुले , पंखी रस अभिसार।।८

– छगन लाल गर्ग विज्ञ!

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