ज़िन्दगी….देश के रक्षकों की

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ज़िन्दगी….देश के रक्षकों की

उनकी ज़िंदगी क्या है
कोई सोच भी नहीं सकता
किस दिन मौत लिखी हो
कोई रोक भी नही सकता
सर कटेगा या धड़
उन्हें एहसास भी नहीं होता
अगले पल क्या हो जाए
उन्हें आभास भी नहीं होता
उनकी माँ भी प्यार लुटाती है
फिर भी वो माँ को रुलाते हैं
इस देश की हर माँ खुश रहे
इसलिए
खुद की माँ को दुःख दे जाते हैं
उनकी भी पत्नी,,बच्चे हैं
मिले वर्षों तक हो जाते हैं
जो कल तक चलना सीख रहे
उनके वो बच्चे बड़े हो जाते हैं
अपने घर… परिवार से दूर
वो सरहद पर बैठे रहते हैं
इस मुल्क की रक्षा की खातिर
कई जतन करते रहते हैं
अचानक ही तोपों से
उन्हें छलनी कर दिया जाता है
पर उनके आखिरी लफ्जों में भी
हिंदुस्तान समाता है
सोचों
कोई अपना पूरा जीवन
इस देश को सौंप देता है
हम सब की हिफाज़त के लिए
खुद को झोंक देता है
बदले में उन्हें क्या मिलता है
बस…..
श्रद्धांजलियों का दौर चलता है
मुआवजों की घोषणाएं होती हैं
दो मिनिट का मौन होता है
और बस चंद सभाएं होती हैं
अगले ही दिन हमारे नेता
उस शहादत को भुला देते हैं
चुनाव….सत्ता….विपक्ष में
सारा ध्यान लगा देते हैं
सैनिकों की हिफाज़त कैसे हो
ये मुद्दा गौण हो जाता है
और एक अभिनेता के मरने पर
पूरा देश शोक मनाता है
सोचो वो ही ना होंगे तो
अस्तित्व हमारा क्या होगा
देश के लिए शहीद होने का
जज्बा ही न रहा तो क्या होगा
जिस देश ने नेता..अभिनेता बनाया
वो देश ही न रहा तो क्या होगा
ये देश ही न रहा तो क्या होगा

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प्राध्यापक(हिंदी साहित्य)

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