कॉफी का एक सिप

कॉफी का एक सिप

“कुछ और दिखाइए . “

” मैंम ! इस बार आप भले ही काफी दिनों बाद हमारे शोरूम में  आयीं है , पर मुझे आपकी च्वायस का पता है . मैंने आपको लेटेस्ट डिजाइन दिखाएँ हैं .’

” वो तो ठीक है , पर यह मेरी च्वायस नहीं है , आप नया दिखाइए .”

” मैंम , यह नया ही तो है . इस बार आप अकेली ही आई हैं .आपके साथ हस्बेंड नहीं आये .शायद इसीलिए आपको साडी पसंद  करने में इतनी दिक्क्त आ रही है .”

” क्या मतलब …”

” मैंम वो जब भी आपके साथ होते  हैं तो आप उनकी एडवाइस मांगती हैं और कम से कम कीमत पर आप वो साडी लेकर गयीं हैं जो आपकी पर्सनेलिटी को बहुत सूट करती है .”

” ..!” उनकी आखें भर आयीं .

” सॉरी मैंम , मैंने आपको हर्ट किया क्या ?”

” हाँ आंटी , आप ऐसा न कहती तो अच्छा था , पापा को गए  तो  वन ईयर  होने को हैं . मम्मी उन्हें बहुत मिस करती हैं , इसलिए मैं इनका मूड चेंज करने के लिए शॉपिंग करने ले आयी .   .”

” ओह !  सॉरी . आप इनकी  बेटी  है ?”

” हाँ ,मैं इनकी बेटी हूँ . असल में साडी तो मेरे लिए चाहिए थी  , मैंने सोचा  मम्मी मार्किट वगेरह में घूमेंगी तभी तो  अपनी रूटीन लाइफ में वापस आ पायेंगीं न.”

” पर मैंम  जिनके साथ आप हमेशा आती थी , वो अंकल तो अभी पिछले हफ्ते ही हमारे शोरूम से दो साड़ियाँ परचेज करके गए हैं .”

” वो हमारे फेमिली फ्रेंड हैं … मम्मी तुम कुछ और पीस देखो , मैं दुसरे काउंटर पर कुछ और ट्राई करती हूँ .”कहकर बेटी दूसरी ओर चली गयी .

” क्लोज कैसे ?’

”  मैंम , मुझे याद है कि आप हमारी ही शाप में बैठकर एक साथ खाना खाते थे , एक ही गिलास में पानी पीते थे ओर फिर आपके ही हेंडकी से आप दोनों  हाथ वगैरह भी  साफ़ करते थे , कॉफी भी आप दोनों साथ – साथ और एक ही कप से सिप करते थे  …….. मैंम  वे आपकी फेमली के इतने   क्लोस हैं  तो फिर आज भी आप  उन्हें ही ले आतीं , उनकी च्वायस आप पर बिलकुल फिट बैठती है ओर हमारा काम आसान हो जाता है , हमें आपको कन्विंस करने में ज्यादा भी  मेहनत नहीं करनी पड़ती .”

” कस्टमर्स की  पर्सनल बातों पर आपको नजर नहीं रखनी चाहिए ओर उन पर चर्चा तो बिलकुल नहीं…” वे तुनक कर बोलीं .

” प्लीज मैंम . मेरा वह मतलब बिलकुल नहीं था . मैं तो किन्ही स्वीट लम्हों को शेयर कर रही थी .  . मैंने अपनी जिंदगी में ऐसे बहुत कम कपल्स को देखा है जो अपनी शादी के इतने लेट दिनों में भी इतने केयरिंग होते हैं ,  आप दोनों की बॉडी- लेंग्वेज तो एक – दुसरे को बेहद प्यार करने वाले कपल्स जैसी ही  होती थी , .जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी और आप दोनों मुझे याद रह जाते थे., सिर्फ इसीलिए मैंने उनको याद किया . आप प्लीज बुरा न माने ,मैं भी तो एक औरत ही ही हूँ न मैंम , जिंदगी में आजादी  के कुछ  पलों पर हमारा भी हक़ है  . ”

” ओ . के .ठीक है . हम फिर कभी आएंगे…अन्नू आ जाओ . अभी चलते हैं . ”

– सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

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