एक पत्र बच्चों के लिए

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एक पत्र बच्चों के लिए

By |2018-07-03T22:01:38+00:00July 3rd, 2018|Categories: विचार|0 Comments

एक पत्र
प्यारे बच्चों,

आज बस यूं ही तुमसे बात करने का मन कर आया, फोन पर तो हमेशा ही होती हैं, लेकिन कई बार कुछ लिखने का भी मन होता है,जो चिरस्थाई हमेशा आपके पास यादों में बना रहे। तुम दोनों तो जन्म से साथ हो, लेकिन हमारे जीवन में दो और बच्चे ही नहीं, परिवार जुड़ कर हमारे घर का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।जीवन निरंतर निर्बाध गति से आगे बढ़ रहा है। मेरेे पास कुछ यादें, खट्टी मीठी, और अनुभवों की किताब भी हैं, शायद कुछ मार्गदर्शन हो सके, तुम्हारे जीवन में काम आ सके।मैंने कई बार डांटा ही नहीं ,पिटाई भी लगाई थी। मैं अच्छा पिता बन पाया या नहीं यह तो पता नहीं, लेकिन आप जब नए-नए पिता बनते हैं तो कुछ कमियां….. तो रह ही जाती हैं। आज मैं उन सबके लिए तुम बच्चों से सॉरी….. भी बोलना चाहूंगा। क्योंकि इन चीजों को आप एक उम्र के साथ ही समझ पाते हैं। इसके लिए मैं तुम्हारी मां का शुक्रगुजार रहूंगा, उसने मुझे हेकड़ पिता की जगह एक दोस्त पिता के रूप में पेश करने की कोशिश की। मुझे याद है एक बार मैंने मात्र पचास पैसे के गुब्बारे के लिए डांट लगाई थी, जबकि मैं लियो का खिलौना दिलाने तैयार था, यह एक नौसिखिए पिता का ही व्यवहार था, जो बच्चे की खुशी नहीं समझ पाया।आज मैं उम्र के उस दौर में हूं, जब कहते हैं कि बुजुर्ग, फिर से बच्चा बन जाते हैं, (या अड़ियल, खड़ूस जो हमेशा खुद को ही सही मानने हैं)। दिल तो बच्चा है जी……. अब तुम मुझे बच्चा ही समझना। और तुम बच्चे!!!!!! मेरे माता पिता की भूमिका में, इसी तरह व्यवहार करना। हो सकता है कि मैं छोटे बच्चे की तरह खाना खाते, या कपड़े पहनते समय कुछ गिरा दूं, या सब्र ना कर पाऊं, कहीं जाते वक्त उतावला हो जाऊं तो मेरे साथ धैर्य से पेश आना। यह एक गुजारिश भी समझ सकते हो, अगर कभी मैं अपने आप को नई चीजों के साथ सामंजस्य ना बिठा पाऊं तो मुझ पर खीझना भी नहीं। हो सकता है, आज की भागदौड़ को देखते हुए तुम बहुत बिजी रहोगे, लेकिन फिर भी अगर मैं बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त भूलने लगूं या अच्छी तरह से उठ बैठ नहीं पाऊं तो तुम झुंझलाना बिल्कुल भी नहीं। और तुम मेरे साथ बैठ कर दो मिनट बात करोगे तो यही मेरी सबसे बड़ी खुशी भी होगी। हो सकता है मैं तुम्हें शायद समय नहीं दे पाया होऊं….., या कभी तुम्हारे मन का कुछ ना कर सका तो इसके लिए तुम मुझे दोषी समझते होंगे, लेकिन समय के साथ अब उम्र की इस परिपक्व अवस्था में समझ सकते हो, हमने सदा तुम्हें the best देने की कोशिश की थी। मैं हमेशा अपने सही या बहुत अच्छा होने, का दावा भी नहीं कर रहा। हो सकता है मैं और तुम्हारी मां समय के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पाएं, कभी शरीर से भी लाचार हो जाएं, और एक दिन ऐसा आए कि चलने से मजबूर लगे, तो तुम चार कदम मेरे साथ जरूर चलना यही मेरी सबसे बड़ी पूंजी, लाठी, सहारा होगा। तुम बच्चे मेरी भविष्यनिधि हो। एक उम्र के बाद समय व्यतीत करना वाकई बहुत मुश्किल होता है, और उस समय ज्यादातर वृद्धजन मरने की बातें करने लगते हैं।इन सब बातों से तुम परेशान बिल्कुल नहीं होना, एक तरह से यह भी जिंदगी का हिस्सा है, उसी की तैयारी, जिसके लिए तुम तैयार रहो। अन्यथा अचानक कुछ घटित होने पर बच्चे स्वयं को तैयार ही नहीं कर पाते। Be brave…. दूसरे उम्र का यह पड़ाव, वास्तव में, जिंदगी जीते नहीं, उस समय यूं लगता है जिंदगी काट ही तो रहे हैं। हमारी उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर, तुम धैर्य रखना। हमारी गलतियों……. के बाद भी तुम्हारी मुस्कुराहट ही हमारा सहारा होगा। अब तुम भी अपने अपने बच्चों के माता व पिता बन चुके हो, तुम्हें भी शायद महसूस हुआ होगा, कि कभी बच्चों से ज्यादा प्रिय कुछ भी नहीं होता। ये वास्तविकता है, कई बार मैंने ये अपने चारों ओर घटित होता देखा है, बच्चे नहीं उम्रदराज लोग भी अपने वृद्धजन से किस तरह का व्यवहार करते हैं,यह शायद सबसे त्रासद स्थति रहती होगी। लेकिन हमें परवरिश पर नहीं, तुम बच्चों पर फख्र, नाज है। शायद कुछ ज्यादा हो रहा है, फूल कर कुप्पा (खुश) होने की जरूरत नहीं है। हम आ रहे हैं,अगले महीने। प्यारे बच्चों, ये समय ही हमारी अमूल्य निधि है, इसे सहेजे रखना।

तुम्हारे माता,पिता।

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