घर वापसी

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घर वापसी

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घर वापसी

जब आए थे
खूब रोए थे
बिछुड़ने का दु:ख होता ही है
अब घर वापसी है
जो – जो लेकर चले थे
सहेज लो
मैं इक – इक करके सब याद कर रहा हूँ
इन दिनों फिर से गीता पढ़ रहा हूँ ।

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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