क्या कहेंगे लोग

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क्या कहेंगे लोग

By |2018-07-21T11:24:43+00:00June 25th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

सबसे बड़ा है रोग, क्या कहेंगे लोग
लोगों की इस बात की जो करता है परवाह
खुद के जीवन जीने का है वो अपवाद
न जी पाता है न मर पाता है
न कह पाता है न सह पाता है
बस घुट घुट के जीवन जीता जाता है
ये जीना भी कोई जीना
इससे अच्छा मर जाना है
जो इस सोच से ऊपर उठ जाता है
उसे जीवन जीना आ जाता है
कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना
गर जी भर के जीना है लोगों की मत सोंचो

खुद के दिल की चाहत क्या है
गैरों को क्या मालुम
वो अपने भी गैरों से हैं बढ़कर
जिनको दिल के जज्बातों की कोई परवाह नहीं
फिर भी तू न रूठा कर इनसे चाहे गैर होंं या अपने
जो खुद के दिल की बाते हैं
तो खुद के दिल से ही पूछा करना
अपने दिल की जज्बातों को न यूँ जाया करना
न जीने की कोशिश करना तुम सौ पल,
खुद का दिल दुखाकर जीना भी कोई जीना है
एक लम्हा, एक पल जी लेना खुद के दिल को हसाकर
ख़ुशदिल होकर जीना है तो ज्यादा मत सोचा करना
दूरी की क्या परवाह है करना, दरिया का काम तो है बहना
के लोग क्या कहेंगे
ये रोगों का है रोग, नहिं इसका कोई तोड़
के लोग क्या कहें, लोगों की मत सोंचो
कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना

– सुबोध उर्फ सुभाष

 

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