काश वो दिन फिर से आये

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काश वो दिन फिर से आये

By |2018-06-22T23:05:43+00:00June 22nd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

ये गीत मेरे यार को समर्पित है इसको संजोया मैंने जरूर  है पर इन शब्दों की उपज मेरे यार की भावनाओं के द्वारा की गई है

काश वो दिन फिर से आये

बागों में कूँके कोयल, कूँके गाये मतवाली

कूँके कोयल की मीठी, दिलवर की याद दिलाये

काश वो दिन फिर से आये

वन में नाँचे गायें, शोर मचाएं मोर

जब सावन की प्यास लिये पपीहा बोले

प्यासा तनमन मेरा, यूँ तड़पे जोरों जोर

हर धड़कन थम जाए

जो उनकी एक झलक मिल जाये

काश वो दिन फिर से अाये

बैठी रहूं मैं जिसकी राह निहारे

कि उनकी एक झलक मिल जाये

देख के जिसको एक झलक मैं फिर छुप जाऊँ

एक पल न देखूं तो मेरा मन घबराये

काश वो दिन फिर आये

रहूँ हमेशा मैं खिली खिली सी

मन मेरा सोच के जिसको मुस्काये

बिन देखे जिसको नही अब चैन आये

काश वो दिन फिर आये

वो जादुई निगाहें जिसकी,

अन्दर तक दिल को छू जाए

जिसकी मुस्काहट अन्तर्मन में यूँ समाए

झगड़ा करुं मैं जिससे, गुस्सा करुं मैं जिससे

उसकी एक मुस्कान से मेरा सारा गुस्सा गुम हो जाये

काश वो दिन फिर आये

पल पल जिसको मैं छेड़ूँ

पूछूँ मैं उससे सदा यही, कि क्या तुमको गुस्सा आये

मेरा कहना सुन वो, बस यूँ मन्द-मन्द मुस्काये

काश वो दिन फिर से आये

…….उम्मीदों के इस आंगन में एक फूल सजाया है

दिल देकर उनको अपनी जान बनाया है

तेरी खुशियों के खातिर खुद के अरमान मिटा डाला

तू है मेरे दिल की धड़कन,

जिसके पतझड़ का मौसम आया है

बनके आ… जा..

दिल के सूने आंगन में, तू सावन की बहारें

हो जायेँ फिर से प्रेम की वो बरसातें

दिल से दिल को तू कोई राग सुनाए

काश वो दिन फिर से आये

काश वो दिन फिर से आये…...

31.05.2018 10 pm

सुबोध उर्फ सुभाष

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