इंतजार कर रही हूँ।

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इंतजार कर रही हूँ।

By |2018-06-25T20:20:02+00:00June 25th, 2018|Categories: कविता|Tags: , |0 Comments

इंतजार कर रही हूँ।
उस पल का
जब तुम मुझसे मिलोगे, और में तुमसे।
इंतजार कर रही हूँ,
उस शाम का
जब ढलती शाम में भी रूमानियत होगी।
और फिज़ाओ में इश्क़ की बरसात होगी।
हा मै इंतजार कर रही हु तुम्हारा ,
क्योकि बहुत दिन हो गए है
तुमसे मिली नही हूँ।
इस जुदाई के आलम में अब मुरझाइ कली बन गइ हूँ।
जो, अपने भवरे बिन खिली नही हु।
हा बहुत दिन हो गए, तुमसे मिली नही हु।
तेरी यादो में तुझसे मिलने को अरदास बार बार कर रही हु।
हाँ, मै इंतजार कर रही हु।
मै याद कर रही हु, वो हरी सावन की बरसात ।
जब परदेसी पिया , तुम थे मेरे साथ।
मेरी नादानी पर थे, मुझसे नाराज़।
बेखबर थी मैं उस राज से ,जो दिल कर रहा था एहसास।
शायद कुछ तो हो रहा था खास।
बारिश की ,बूंदे तेज़ थी।
हवा की रफ्तार, इन धड़कनो से भी तेज थी।
सारा जहाँ गुम था , इन बारिश के नज़ारे में
और तुम थे गुम, मेरे।
और मै थी गुम तुम्हारे नज़राने में।
हाथ थाम कर उस अपनी नाराजगी में भी ,
तुम मेरे साथ थे।
मानो मेरी सांसो में समाते हुए, इन ठंडी हवाओं का सुर और साज थे।
तभी एक दिखा बन्द होता ढाबा,
जैसे दिखा डूबते को सहारा।
वो ढाबे वाले चाचा ने चाय बना दी
उस चॉय में इलायची मिला दी।
चाय की चुस्की तुमने ली, चॉय की चुस्की हमने ली
गर्म, गर्म पकोड़े खाए, और फिर तुम भी मुस्कुराए।
चलो बारिश रुक ही गई।
और तुम्हारा गुस्सा भी।
पर, तभी उस बारिश में भीगने से मुझे बुखार हुआ था।
शायद उसी पल, मुझे तुमसे प्यार हुआ था
तुम चला रहे थे , अपनी गाड़ी
साथ में थी, तुम्हारे मै, अनाड़ी।
तभी अचानक मेरी बिगड़ी तबियत ने
मेरे आँखों के आगे ,तेरा चेहरा दिखा ।
और मेरी पलके बन्द हो गई थी।
मेरा सिर तेरे कंधे पर जा गिरा।
तभी तुम्हारी मोटर रुकी, और तुम्हारे हाथो ने मेरे
चेहरे को स्पर्श किया।
तुम ने मेरा नाम पुकारा।
मेरी ख़राब तबियत को भापा।
फिर मुझे अपने अश्क के बूंदो से जगाया।
मुझे तभी होश आया।
धुंदली नजरे हो रही थी, फिर तुम्हारा चेहरा
नजर आया
तो माथे पर तुम्हारे परेशानियो का शिकन नज़र आया।
जब पूछा मैंने, उठ कर
तो तुमने मुझे गले लगाकर कहा की
तुम ना मौत से डरते हो, ना रोने से डरते हो।
तुम मुझे खोने से डरते हो।
बस तुम्हारी यही बात दिल में घर कर गई।
तभी मै, भी तुमसे ,इज़हार कर गई।
तब से ही तुम मेरी आरजू ए तम्मना बन गए
मेरी जिंदगी में चाहत का पन्ना बन गए।
लेकिन फिर
तुम्हारी नौकरी ने तुम्हे ,दुसरे शहर जाने को मजबूर किया।
और मुझे तुमसे दूर किया।
लेकिन
अब तो में बिन तुम्हारे सूखा फूल हु।
बिन तुम्हारे बेफिजूल हु।
वक्त बेवक्त हो, रहा है।
मेरा इंतजार रो रहा है।
अब कितना तड़पाओगे,
बताओ तुम कब वापस आओगे।
अब तो पुराणी यादो से ही प्यार कर रही हूँ।
सुनो।
मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हु।
वादे के सहारे ही तुझपर, अब भी एतबार है।
यकीन है, देर से ही सही पर तुम आओगे।
तेरी दी सौगात से प्रीत बेहिसाब कर रही हूँ
सुनो।
मै तुम्हारा, इन्तज़ार कर रही हूँ।

– ममता

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