अश्क़ हैं मोती तेरे तू बहाना नहीं

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अश्क़ हैं मोती तेरे तू बहाना नहीं

By |2018-06-25T20:11:23+00:00June 25th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

 June 24, 2018

बहर-फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
वज़्न-212 212 212 212

अश्क़ मोती तेरे तू बहाना नहीं।
टूट के हार से दिल जलाना नहीं।।

दीप का काम है रोशनी बाटना।
आँधियों में कभी लो बुझाना नहीं।।

चाँद-सूरज चलें हैं अकेले सदा।
साथ देता कभी ये ज़माना नहीं।।

शेर राजा रहे भीड़ से दूर भी।
झुंड का शौक़ ये तू लगाना नहीं।।

साथ जो छोड़ दें बीच ही राह में।
ख़्वाब उनके ज़रा तू सजाना नहीं।।

जो बहादुर हुए मंज़िलें पा गए।
रोक पाया कभी ये डराना नहीं।।

छल-कपट भूल जा कुछ मिलेगा नहीं।
जीतता है हुनर ये चुराना नहीं।।

प्यार ज़न्नत लिए सब कहे हैंं यही।
यार से तो बड़ा है खज़ाना नहीं।।

साख से जो गिरा फूल मुर्झा गया।
तू उठाना सदा ही गिराना नहीं।।

प्यार प्रीतम करे भूल पाए न जग।
बात दिल से लगा ये हटाना नहीं।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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About the Author:

राधेयश्याम प्रीतम पिता का नाम श्री रामकुमार, माता का नाम श्री मती किताबो देवी जन्म स्थान जमालपुर, ज़िला भिवानी(हरियाणा)

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