मोहब्बत मेरी।

मोहब्बत मेरी।

ए मोहब्बत मेरी तुम ,

लगती हो जैसे ढलती शाम,

उगता रवि,चलती पवन

कवि की कविता,शायर की शायरी

गुलज़ार की गजल,प्रेम की कहानी

पक्षियों का कलरव, कोयल की राग

पर अब ना रही तुम, मेरी मोहब्बत

एक अरसा हुआ है,देखे तुम्हे

शायद नही मिल पाओगी, तुम मुझे

ए मोहब्बत मेरी तुम।

-दिनेश गर्ग ‘कोलू’

मोब. नं. 7426891468

Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

दिनेश गर्ग कोलू

दिनेश गर्ग कोलू पाबूजी 342314

Leave a Reply

Close Menu