रोमांटिक दोहे

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रोमांटिक दोहे

रोमांटिक दोहे

प्रीतम ऐसा हाल जी,नयन हुए जो चार।

उजड़े गुलशन लौट के,बहार लाई प्यार।।

 

प्रीतम मिलना नैन का,बने ख़ुशी का सार।

सुखद हृदय की राह है,हुआ यार दीदार।।

 

प्रीतम मोती प्रेम के,हंस हृदय की चाह।

सागर सुंदर जगत् में,चुगते करना वाह।।

 

प्रीतम गगरी प्रेम की,लिए खड़ा में हाथ।

प्यास बुझे रे यार की,रहिए मेरे साथ।।

 

प्रीतम तेरी चाह में,हृदय हुआ है नेक।

करना स्वागत प्रेम से,फूल प्यार के फैंक।।

 

प्रीतम करना नाज़ तू,जला प्रेम का दीप।

रोशन जीवन यार हो,जैसे मोती-सीप।।

 

प्रीतम छूना प्रेम का,जीवन की मधु तान।

जैसे कोयल कूक हो,अमर प्रेम का गान।।

 

प्रीतम प्रेम गुलाब जल,नयनों में दो डाल।

देखूँ सदैव यार को,रहूँ किसी भी हाल।।

 

प्रीतम हमतुम यूँ मिलें,मिलें चाँदनी-चाँद।

रोक सके ना जगत् ये,मिलते सबकुछ फाँद।।

 

प्रीतम तुम बिन क्या कहें,गले नहीं है दाल।

मेघ बिना जो मोर का,वही हुआ है हाल।।

 

– राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”

 

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राधेयश्याम प्रीतम पिता का नाम श्री रामकुमार, माता का नाम श्री मती किताबो देवी जन्म स्थान जमालपुर, ज़िला भिवानी(हरियाणा)

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