अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर

By |2018-07-03T21:54:16+00:00July 3rd, 2018|Categories: स्वास्थ्य|0 Comments

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर
स्वास्थ्य के लिए आवश्यक नींद

अगर नींद आ जाय तो सो लिया करो।
रातों को जागने से मोहब्बत लौटा नहीं करती।।
क्या आप पर्याप्त नींद लेते हैं? यह एक रिस्क लेना ही है, या यूं कहें आग से खेलने जैसा।अगर आप तनाव में रहते हैं, तथा एक गहरी अच्छी नींद नहीं लेते तो आप स्वयं कई साइलेंट खतरनाक बीमारियों को आमंत्रित कर रहे हैं।
निद्रा शारीरिक एवं मानसिक आराम के लिए बेहद जरूरी है, और यह जीवन का एक प्राकृतिक कर्म है।इसे टालना नहीं चाहिए, कितनों को मिलती है सुकून भरी नींद, स्वस्थ रहने के लिए नींद सर्वप्रथम है।दिनभर की थकान की पूर्ति रात्रि निद्रा से हो जाती है। जो रात को सो नहीं पाते या सोते नहीं हैं, उनके स्वास्थ्य में परेशानी रहती है।
Early to bed and early to rise,
Makes a man healthy wealthy and wise.
रात्रि की एक गहरी अच्छी नींद आपको अगले दिन के लिए अधिक ऊर्जावान बनाती है।
स्पर्धा के इस दौर ने लोगों की दिनचर्या को अव्यवस्थित कर दिया है।नौकरियां भी 24×7की होने लगी हैं, इस वजह से तथा रहन सहन में बदलाव के कारण भी अनिद्रा की समस्या बढ़ती जा रही है।अनियमित दिनचर्या,व्यस्तजिंदगी, कैरियर की चिंता, पढ़ाई, सामाजिक दबाव, बढ़ती उम्र, एंग्जाइटी, असंतुलित खानपान, देर रात पार्टी आदि कई कारण हैं जो अनिद्रा की वजह बनते हैं।
हालांकि इन सब में अव्यवस्थित होने मुख्य कारण व्यक्ति स्वयं ही है।स्वयं को बदलिये, अपनी दिनचर्या का रूटीन बनाकर हम अनिद्रा से छुटकारा भी पा सकते हैं, तथा दवाओं पर निर्भरता भी कम कर सकते हैं। But first step is yours.
एक अच्छी नींद आपकी याददाश्त को बेहतर बनाती है, वहीं नींद की कमी शरीर में तनाव एवं अवसाद पैदा करने वाले कारणों की वजह बनती है।(उत्पन्न करती है) अच्छी नींद से आप स्वयं को शांत महसूस करते हैं, क्योंकि अच्छी नींद से तनाव पैदा करने वाले हार्मोन्स का स्तर कम होता है, नियंत्रित होता है। इन सबसे बचने के लिए नींद परम आवश्यक है। अच्छी नींद न आने से पाचनतंत्र भी गड़बड़ा जाता है, गैस, अपच की समस्या होने लगती है।फिर एक चक्र सा बन जाता है।अच्छी नींद नहीं तो पेट की समस्या और पेट की गड़बड़ तो नींद की गड़बड़(correlated)। पर्याप्त नींद से रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है।अच्छी नींद से आंखों के नीचे काले घेरे तथा चेहरे पर झुर्रियाँ भी नहीं होती। जिस भी रोगी व्यक्ति को अच्छी गहरी नींद आती है, वह जल्दी ठीक होता है।और स्वस्थ है तो प्रसन्नचित्त रहता है। क्योंकि नींद में कई आरोग्यदायक गुण होते हैं। निद्रा को समस्त रोगों की प्राकृतिकचिकित्सा कहा जाता है। रोगी के लिए तो नींद आहार ही नहीं दवा भी है।
कम से कम 6-8 घंटे की नींद जरूरी है एक युवा को।कोई 4 घंटे में भी अच्छा महसूस करता है, कोई 7-8 घंटे सोकर भी तरोताजा नहीं हो पाते।ये अपने अपने शरीर की मांग है।उम्र के अनुसार भी नींद कम ज्यादा होती है। नवजात शिशु जहां 20-22घंटे सोते हैं, वहीं वृद्धावस्था में नींद बहुत कम हो जाती है, इसे अनिद्रा न माना जाय।योगियों की भी नींद कम होती है।
नींद की भरपाई करना मुश्किल है, एसा नहीं है कि कुछ दिन नींद अवॉइड करके फिर एक साथ सोया जाय।यह संभव नहीं है। लेकिन आजकल की नौकरियों में कई बार युवा सोमवार से शुक्रवार तक जम कर कार्य करने एवं व्यस्तता के कारण नींद पूरी नहीं कर पाते,और सोचते हैं इसकी पूर्ति शनिवार को कर लेंगे। जो न तो उचित है और न ही संभव। इससे आपकी कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है।
नींद की आवश्यकता को गम्भीरता से समझें। ताकि तन और मन स्वस्थ रहे।
वैज्ञानिकों और उपासकों के मतानुसार(if possible) पृथ्वी पर सीधे सोना सर्वोत्तम है, क्योंकि पृथ्वी के संपर्क से पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों को जीवनीशक्ति उपलब्ध होती है। कोमल गद्दों विशेष कर बढ़ते बच्चों के लिए तो कोमल नर्म बिस्तर पर सोना स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है। सोते समय मनुष्य का सिर किस दिशा में हो इसका भी शास्त्रीय विधान है। मार्कण्डेय स्मृति में उल्लेख है कि रात्रि को पूर्व या दक्षिण की ओर डर करके सोने से धन, आयुष्य की वृद्धि होती है।पश्चिम की तरफ चिंता तथा उत्तर की ओर सिर करके सोने से प्राणतत्व का क्षय होता है। आम घरों में भी बुजुर्ग दक्षिण की ओर पैर तथा उत्तर की ओर सिर करके सोने की मना करते हैं। इस अवस्था में केवल मृतशरीर को ही रखा जाता है।
They can do most who sleep best.
अर्थात जो अच्छी तरह सोते हैं, या सोना जानते हैं वे बहुत कुछ कर सकते हैं।निद्रा के गुणों के बारे में आयुर्वेद में भी कहा गया है—
निद्रा तु सेविता काले धातु साम्यमतिंद्रताम।
पुष्टिवर्ण बलोत्साहं बह्निदिपतिं करोतिहि ।।
अर्थात दिन में व्यर्थ न सोकर जो रात के दूसरे पहर से निद्रा आरंभ कर रात के चौथे पहर जग जाते हैं, उनकी शरीर की सभी धातुएँ सम अवस्था मे रहती हैं। आलस्य नहीं रहता तथा शरीर पुष्ट होता है।
गहरी,अच्छी नींद के लिए- रात्रि को भारी भोजन से बचें,हल्का सुपाच्य भोजन ही करें। सोने से दो तीन घंटे पूर्व ही करें तो बेहतर है। चाय कॉफी तो बिल्कुल नहीं। एक शोध के अनुसार ऐसा भोजन, जिसमें ट्रिप्टोफैन, सेरोटोनिन या कार्बोहाइड्रेटे वाली खुराक शामिल करते हैं, तो नींद अच्छी आती है।नींद से शरीर की अनावश्यक गंदगी, गर्मी दूर होकर शरीर पुष्ट होता है।
ट्रिप्टोफेन –के लिए नट्स, बीन्स, चीज़ आदि।(प्रा.चि.)में शाकाहार को ही महत्व देते हैं, अन्यथा मछली और अंडे में भी।
कार्बोहाइड्रेट– के लिए ब्राउन राइस, आलू, शकरकंद आदि।
सेरोटोनिन — के लिए केला दूध सहायक हैं, नींद लाने में। अच्छी नींद के लिए सोने के कमरे को व्यवस्थित रखें, अंधेरा भी उचित है। टीवी को कमरे में न रखें और न ही देखते देखते सोने की आदत बना लें।इनके नुकसान शुरू में पता नहीं चलते, लॉग टर्म में बाद में पता चलते हैं।शवासन बेहतर उपाय है अच्छी नींद के लिए, किसी योग गुरु से सीख सकते हैं।सोने से पहले नहाना भी अच्छा उपाय है, नहीं तो भलीभांति हाथपैर ही धो लें। रात्रि सोते समय पढ़ने की आदत भी अच्छी है।हो सके तो तलवों पर तथा सिर की मालिश से भी गहरी नींद आती है।
अल्कोहल,नींद की गोलियां बिलकुल न लें।हो सकता है इनसे नींद तो आ जाय लेकिन स्लीपिंग क्वालिटी कम हो जायेगी, आधी रात में ही नींद खुल जायेगी।इस तरह की नींद प्राकृतिक नींद न होकर एक नशा है। इसमें प्राकृतिक नींद के फायदे नहीं मिल पाते। नेचुरोपैथी में तो खाने (अन्न)का नशा ही काफी है, मद्यपान का नहीं भूखे न सोएं।अतः पूर्ण शांति के साथ मन को उथल पुथल से दूर कर सोएं, और आरोग्य लाभ उठाएं। अगर केवल काम ही करते रहें और नींद न लें तो शरीर तथा दिमाग दोनों कार्य करने लायक नही रहेंगे। आप इसमें worst स्थिति के बारे में सोच सकते हैं, इसी से समझ लीजिए गहरी, अच्छी नींद कितनी आवश्यक है।

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