यह क्या हवश है,यह क्या है वासना,
दरिंदा है वह उसे इन्सान ना मानना;
मर्दों पर है कंलक उसको जिंदा छोडना,
ऐसी हैवानियत पनपने लगी हर जगह,
किस भेष में है राक्षस कठिन पहचानना|
हल सूझता नही समस्या बडी विकट,
कहां जाऊं के जी पाऊं पीडा बिना ?
इक इक पल मेरे रब मुश्किल है काटना |
-अंजना योगी

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