कहां जाऊं के जी पाऊं

Home » कहां जाऊं के जी पाऊं

कहां जाऊं के जी पाऊं

By |2018-07-03T06:41:16+00:00July 3rd, 2018|Categories: कविता|Tags: , |0 Comments

यह क्या हवश है,यह क्या है वासना,
दरिंदा है वह उसे इन्सान ना मानना;
मर्दों पर है कंलक उसको जिंदा छोडना,
ऐसी हैवानियत पनपने लगी हर जगह,
किस भेष में है राक्षस कठिन पहचानना|
हल सूझता नही समस्या बडी विकट,
कहां जाऊं के जी पाऊं पीडा बिना ?
इक इक पल मेरे रब मुश्किल है काटना |
-अंजना योगी

Say something
Rating: 4.0/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment