शायरी

शायरी

By |2018-07-09T16:47:56+00:00July 9th, 2018|Categories: विचार|0 Comments

लौट आता हूँ हर रोज़ उसके दराबर से

ना जाने कौन से ऊंचाई पर रहता है ख़ुदा

हर बार मेरा दुआ खाली ही जाता है।

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी

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