किसान

 

किसान है हम हल चलाकर
हवन करते है हम
अपने शरीर का
चिलचिलाती गर्मी की धूप मे
कड़कती सर्दी की धुंध में
अपने शरीर का हवन करते है हम
इसी मिट्टी में हमारे बच्चे पलते है
बढ़ते है सारे ऐशो आराम से
दूर रहते है फिर भी मुस्कुरा कर
हमसे कहते है-पापा आप कितने अच्छे है
वर्ना सड़क पर तो लाखो लोग
भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मरते है
तो सोचो हम कितने सुख से है
और फिर मेरे अंदर लाखो
सवाल उमड़ते है
किसान है हम चलाकर
हवन करते है हम
अपने शरीर का,

 -प्रीति चौधरी

Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu