आधुनिक दौर है यह
प्रेमियों को है ये भ्रम

धन और वासना को समझे प्रेम धर्म
भावना का न समझे मर्म

धन और वासना से है ये तर
है ये कैसा प्रेम पंथ

समझे न ये प्रेम की पीड़ा
प्रेम को समझे मात्र एक क्रीड़ा

-प्रीति चौधरी

Say something
No votes yet.
Please wait...