बाल यौन शोषण

प्रीति चौधरी..
यह आधुनिक दौर है
समस्याएँ चहुँ ओर है
मनुष्य पर दैत्य की सवारी है
हर अपराध का पलड़ा भारी है
यदि अपने हँसते-खिलखिलाते
बच्चों को नही खोना है
तो समय से पहले हमें
सचेत होना है
अपने बच्चों से मित्रतापूर्ण
संबध बनाए
उन्हें सही और गलत स्पर्श
मे भेद बताएँ
कभी भी,कहीं भी,कोई भी
जान या अनजान
व्यक्ति करे परेशान
हरकतें गलत करें
असहज आप महसूस करें
ततकाल शोर मँचाए
और अपने माँ-बाप को बताएँ
अभिभावक बेखौफ होकर
कदम उठाए
बच्चों के बचपन को खोने से बचाए
अपराधी को सजा दिलाए
बच्चों के सम्मुख एेंसे उदा०
पेश करे
आपके बच्चे भी उसे धारण कर सके
प्रत्येक परिवर्तन का आरंभ सदैव
स्वंय से करे..

Rating: 3.5/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu