शायरी

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By |2018-07-09T16:38:52+00:00July 9th, 2018|Categories: मुक्तक/शायरी|0 Comments

मोहब्ब्त की समा जलाए रखे थे!
ये कैसी हवा चली समा बुझ ही बुझ गया!
और मोहब्ब्त कुर्बान हो गया!!

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी

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