शायरी

Home » शायरी

शायरी

मोहब्ब्त की समा जलाए रखे थे!
ये कैसी हवा चली समा बुझ ही बुझ गया!
और मोहब्ब्त कुर्बान हो गया!!

Say something
Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

Leave A Comment

हिन्दी लेखक डॉट कॉम

सोशल मीडिया से जुड़ें ... 
close-link