जब मैं पहली बार वर्धा आया।
देखा परियों का मेला उसकी।
उसकी आँखों में चाहता थी।
मेरे आँखों में चाहत थी।
वह मिलने को बेकरार थी।
किंतु मैं मजबूर था।

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