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कविता

By |2018-07-05T20:50:36+00:00July 5th, 2018|Categories: व्यंग्य|Tags: , |0 Comments

जब मैं पहली बार वर्धा आया।
देखा परियों का मेला उसकी।
उसकी आँखों में चाहता थी।
मेरे आँखों में चाहत थी।
वह मिलने को बेकरार थी।
किंतु मैं मजबूर था।

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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