गलती, मानने में हिचक क्यों…

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गलती, मानने में हिचक क्यों…

By |2018-07-08T10:49:26+00:00July 8th, 2018|Categories: विचार|Tags: , |0 Comments

गलती मानने में हिचक कैसी?

अगर आप समय पर अपनी गलतियों को #स्वीकार नहीं करते हैं, तो आप एक और गलती कर बैठते हैं।गलती मानने में हिचक या हेकड़ी कैसी? आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते हैं,जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं। जीवन परेशानियों से भरपूर है, जब समस्याओं से सामना होता है तो कुछ भी गड़बड़ी होने पर हम दूसरों को दोषी ठहराते हैं। हम #जवाबदेही से बचते हैं।बहाने बनाना,दोष देना,पीड़ित होने का आभास कराना आसान है।
गलती सबसे होती है कभी जानबूझ कर, कभी अनजाने में। जानबूझ कर की गई गलतियों का कारण व्यक्ति को पता होता है।वह यह कार्य किसी को पीड़ा देने के लिए,स्वार्थवश या किसी दबाव या डर से करता है।एक गलती दुबारा न हो इसके लिए पहले तो हमें उसका अहसास होने जरूरी है।जब हम गलती करके भी स्वीकार नहीं करेंगे तो सुधारेंगे कैसे? कभी अहम भाव के कारण या यूं कहें स्वयं को सही साबित करने की कोशिश में हम गलत होते हुए भी गलती नहीं मानते।जब गलती मानी ही नहीं तो सुधार की संभावना कहाँ बनती है।
#पहले गलती मानें,फिर स्वीकार करें, उस #ग्लानि को महसूस करें, मन में संकल्प करें दुबारा गलती न दोहराने का। आपने जो दुख पहुँचाया है, उसका  प्रायश्चित करें। उसका जो सुकून है, उसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते।गलती न मानने में जो आपका स्वार्थ, अहम आड़े आ रहा था,उससे आपने अपनी अंतरात्मा की आवाज को भी सुनना बंद कर दिया था। एक बार फिर #सच्चेसुख का #आनंद महसूस कीजिए। गलती कर के क्षमा मांगना, तथा क्षमा करना शायद फिर भी आसान है,लेकिन किसी के विश्वास,भरोसे को तोड़ कर वापिस हासिल करना बहुत ही मुश्किल कार्य है।इसलिए किसी का भरोसा मत तोड़िए।
प्रायश्चित किसी भी तरह हो सकता है, स्वयं ही उस गलती का आकलन कर स्वयं को दंडित करें,शारीरिक,मानसिक या आर्थिक किसी भी तरह।आपका सम्मान दूसरों की निगाह में दो पायदान बढ़ जाएगा।इस तरह के प्रयोग आप प्रथम घर से ही शुरू करें, फिर ऑफिस,फिर सामाजिक स्थान पर।आप देखेंगे जिंदगी कितनी बदल गई है।
अपने कार्यों का उत्तरदायित्व लेकर गुस्से या निराशा को हटाकर सकारात्मक होना चाहिए। आपसी सम्बन्धों को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा तरीका है लोगों पर दोषारोपण से बचना,तथा अगर अपनी गलती है तो स्वीकार करने में बिलकुल न हिचकना।
इस जवाबदेही की भावना से हम जिम्मेदार बनेंगे,तथा इस तरह से दायित्वबोध की खुशी भी मिलेगी। सम्बन्धों म् प्रगाढ़ता होगी,इसलिए अगर आप की कोई गलती है तो उसे स्वीकार करना सीखें।
Life is short, Say sorry if you are wrong, everyone makes mistakes.It’s cool.😊 😊

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